न इंजन, न GPS और न बिजली; खिचड़ी-अचार के सहारे नौसेना के जांबाजों ने प्राचीन पाल जहाज से पार किया अरब सागर

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना के जांबाजों ने ‘INSV कौंडिन्य’ पर सवार होकर एक कठिन लेकिन प्रेरणादायक मिशन पूरा किया है। 18 दिनों की इस यात्रा के दौरान क्रू मेंबर्स ने उन चुनौतियों का सामना किया जो 2000 साल पहले हमारे पूर्वज करते थे। जहाज में न तो कोई इंजन था और न ही आधुनिक संचार तकनीक। यह पूरी तरह हवा की दिशा और सूती पाल (सढ़) के सहारे आगे बढ़ा।
जहाज के अंदर की परिस्थितियाँ बेहद चुनौतीपूर्ण थीं:
-
शून्य आधुनिकता: जहाज में न बिजली थी और न ही सोने के लिए कोई कमरा। क्रू मेंबर स्लीपिंग बैग का इस्तेमाल करते थे।
-
साधारण भोजन: पूरे 18 दिन क्रू ने केवल खिचड़ी और अचार खाकर बिताए।
-
सुरक्षा: रात में अन्य जहाजों को चेतावनी देने के लिए उनके पास केवल सिर पर लगे हेडलैंप्स थे।
इस साहसिक मिशन का उद्देश्य यह सिद्ध करना था कि भारत की प्राचीन नौवहन तकनीक कितनी सशक्त थी।



