अंतरिक्ष से परमाणु ऊर्जा तक: भारत और यूएई ने भविष्य की तकनीकों के लिए मिलाया हाथ

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति की मुलाकात में भविष्य की तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने एक ‘इंटीग्रेटेड स्पेस इकोसिस्टम’ बनाने पर सहमति व्यक्त की है, जिससे संयुक्त अंतरिक्ष मिशन और स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य तकनीकी और ऊर्जा समझौते:
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परमाणु ऊर्जा: नए ‘शांति’ (SHANTI) कानून के तहत दोनों देश उन्नत परमाणु रिएक्टरों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMR) पर सहयोग करेंगे।
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ऊर्जा सुरक्षा: HPCL और ADNOC के बीच 2028 से शुरू होने वाले 10 वर्षीय LNG आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
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डिजिटल भविष्य: भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर और डेटा सेंटर स्थापित करने के साथ-साथ ‘डिजिटल दूतावास’ की संभावना तलाशने पर भी बात हुई।
शिक्षा और स्किलिंग: IIT दिल्ली और IIM अहमदाबाद के यूएई परिसरों की सफलता के बाद, अब भारत के ‘डिजीलॉकर’ को यूएई के प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जाएगा ताकि छात्रों के दस्तावेजों का सत्यापन आसान हो सके।
भारत और यूएई के बीच केवल व्यापारिक ही नहीं, बल्कि गहरे सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत हो रहे हैं। इस यात्रा के दौरान अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ (House of India) स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त, यूएई ने लोथल (गुजरात) में बन रहे नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के लिए प्राचीन कलाकृतियां देने की घोषणा की है।
क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता: दोनों नेताओं ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के महत्व को दोहराया। यूएई ने 2026 में भारत की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता का पूर्ण समर्थन किया, जबकि भारत ने 2026 के संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन की सह-मेजबानी के लिए यूएई को अपना समर्थन दिया।
वित्तीय एकीकरण: दोनों देशों की टीमों को अपने-अपने ‘नेशनल पेमेंट प्लेटफॉर्म’ को जोड़ने का निर्देश दिया गया है ताकि सीमा पार भुगतान (Cross-border payments) अधिक तेज और सस्ता हो सके। गिफ्ट सिटी में डीपी वर्ल्ड और फर्स्ट अबू धाबी बैंक (FAB) की उपस्थिति को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में भारत के उदय के लिए महत्वपूर्ण माना गया।



