रक्षा मंत्री का एनसीसी कैडेटों को गुरुमंत्र: जीवन में ‘प्लान-बी’ रखें तैयार और ‘कंफर्ट जोन’ से बाहर निकलें

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 24 जनवरी, 2026 को दिल्ली कैंट में आयोजित ‘एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर’ में कैडेटों को संबोधित करते हुए भारतीय सेना के शौर्य की सराहना की। उन्होंने बताया कि किस तरह सशस्त्र बलों ने पहलगाम हमले का मुंहतोड़ जवाब देते हुए पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया।
युवाओं के लिए ‘अभिमन्यु’ का उदाहरण: रक्षा मंत्री ने कैडेटों को आधुनिक दौर का ‘अभिमन्यु’ बताया, जो किसी भी चक्रव्यूह को भेदने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक अनिश्चितता के दौर में युवाओं को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत होना चाहिए। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान कैडेटों द्वारा निभाई गई भूमिका की प्रशंसा करते हुए उन्हें राष्ट्र की ‘दूसरी रक्षा पंक्ति’ करार दिया।
पुरस्कार वितरण और सम्मान: समारोह के दौरान श्री सिंह ने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कैडेटों को सम्मानित किया। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख निदेशालय की अर्पुन दीप कौर और पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम निदेशालय के पाल्डेन लेपचा को प्रतिष्ठित ‘रक्षा मंत्री पदक’ से नवाजा गया। इसके साथ ही कई अन्य कैडेटों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए गए।
एनसीसी कैडेटों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जीवन में सफलता के व्यावहारिक सूत्र साझा किए। उन्होंने युवाओं को चेतावनी दी कि केवल एक विकल्प (प्लान-ए) पर निर्भर रहने से असफलता की स्थिति में निराशा पैदा होती है, इसलिए हमेशा एक ‘प्लान-बी’ तैयार रखना चाहिए।
एनसीसी की भूमिका पर मुख्य बिंदु:
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अनुशासन और एकाग्रता: श्री सिंह ने कहा कि जहाँ आज की दुनिया वीडियो गेम और फूड डिलीवरी जैसे आरामदेह साधनों में उलझी है, वहीं एनसीसी की ड्रिल और कैंप युवाओं को उनके ‘कंफर्ट जोन’ से बाहर निकालते हैं।
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भटकाव से मुक्ति: उन्होंने बताया कि एनसीसी धैर्य और निरंतरता सिखाती है, जो आज के दौर में ‘इंस्टेंट’ सफलता चाहने वाली पीढ़ी के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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अनुकरणीय विरासत: उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वे स्वयं भी कैडेट रह चुके हैं। कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन मनोज पांडे जैसे परमवीर चक्र विजेता भी इसी संस्था की देन हैं।
उन्होंने जोर दिया कि चाहे युवा डॉक्टर बनें, इंजीनियर या राजनेता, एनसीसी में सीखी गई एकाग्रता उनके हर क्षेत्र में काम आएगी।
77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एनसीसी कैडेटों को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य का सारथी बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि हमारे सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक अधिकारों का आधार है।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं:
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सांस्कृतिक विविधता: रक्षा मंत्री ने 17 निदेशालयों द्वारा तैयार किए गए ‘ध्वज क्षेत्र’ (Flag Area) का दौरा किया और सिंधिया स्कूल, ग्वालियर के कैडेटों द्वारा प्रस्तुत बैंड प्रदर्शन की सराहना की।
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संविधान के प्रति कर्तव्य: उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे संविधान प्रदत्त कर्तव्यों को समझें और उनका निर्वाह करें।
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अग्रणी उपस्थिति: इस अवसर पर एनसीसी महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स और रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
श्री सिंह ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि युवा राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति हैं और देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की जिम्मेदारी अब उन्हीं के कंधों पर है।



