बजट के बाद शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1546 अंक टूटा, STT में बढ़ोतरी से निवेशकों के डूबे अरबों रुपए

मुंबई: बजट 2026 की घोषणाओं के तुरंत बाद भारतीय शेयर बाजार में सुनामी जैसा मंजर देखने को मिला। रविवार, 1 फरवरी को कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 1,546 अंक (करीब 2%) की भारी गिरावट के साथ 80,722 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 495 अंक फिसलकर 24,825 के स्तर पर आ गया। बाजार के जानकारों का मानना है कि बजट में डेरिवेटिव ट्रेडिंग (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने के फैसले ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया है।
सात साल की सबसे बड़ी गिरावट यह गिरावट बीते सात सालों में बजट के दिन दर्ज की गई सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले साल 2020-21 के बजट सत्र के दौरान सेंसेक्स 987 अंक और निफ्टी 300 अंक गिरा था, लेकिन इस बार के आंकड़ों ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
सेक्टरवार स्थिति और दिग्गज शेयरों का हाल बाजार में सबसे ज्यादा मार बैंकिंग सेक्टर पर पड़ी। सरकारी बैंकों के इंडेक्स में 6% तक की बड़ी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से 27 लाल निशान में बंद हुए। भारी गिरावट झेलने वाले प्रमुख शेयरों में BEL, SBI और अडाणी पोर्ट्स शामिल रहे, जो 6% तक टूट गए। इसके अलावा मेटल, मीडिया, FMCG, फार्मा और रियल्टी सेक्टर में भी चौतरफा बिकवाली रही।
बजट के दिन बाजार धड़ाम, सरकारी बैंकों के शेयर सबसे ज्यादा पिटे; जानिए क्या है गिरावट की वजह
आज की बड़ी बातें:
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बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 1546 अंक और निफ्टी 495 अंक गिरकर बंद।
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टैक्स की मार: सरकार ने शेयर बाजार में खरीद-बिक्री पर लगने वाला टैक्स (STT) बढ़ा दिया है। अब ट्रेडिंग करना पहले से महंगा होगा।
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दिग्गज शेयर गिरे: एसबीआई (SBI) और अडाणी पोर्ट्स जैसे बड़े शेयरों में 6% तक की गिरावट आई।
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बैंकिंग सेक्टर को झटका: सरकारी बैंकों के इंडेक्स में 6% की गिरावट रही, जो आज का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा।
बाजार की चाल का टाइमलाइन:
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सुबह 9:15 बजे: सेंसेक्स 100 अंक गिरकर 82,156 पर खुला।
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भाषण के दौरान: जैसे ही टैक्स बढ़ने की खबर आई, सेंसेक्स 1,600 अंक फिसल गया।
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भाषण के बाद: गिरावट गहराती गई और सेंसेक्स निचले स्तर 79,899 तक चला गया।
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अंत में: बाजार मामूली रिकवरी के साथ 80,722 पर बंद हुआ।
क्या होता है STT? यह एक ऐसा टैक्स है जो शेयर खरीदते या बेचते समय आपकी ट्रांजैक्शन वैल्यू से सीधा काट लिया जाता है। स्टॉक एक्सचेंज इसे काटकर सीधे सरकार के पास जमा कर देता है। अब दरें बढ़ने से निवेशकों की जेब पर बोझ बढ़ेगा।



