परीक्षा पे चर्चा 2026: पीएम मोदी ने छात्रों को दिया ‘सफलता का मंत्र’, संतुलित जीवन और नवाचार पर दिया जोर

प्रधानमंत्री मोदी का 9वां ‘परीक्षा पे चर्चा’ सत्र महज एक संवाद नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य निर्माण का एक रोडमैप बनकर उभरा। इस बार पीएम ने माता-पिता, शिक्षकों और छात्रों के बीच के तालमेल पर गहराई से बात की।
शिक्षण पद्धति में बदलाव: प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को सुझाव दिया कि वे ‘जिज्ञासा’ (Curiosity) को हथियार बनाएं। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक आने वाले पाठों के बारे में पहले से बता दें, तो छात्र अधिक सक्रिय होकर सीखेंगे। यह “मन को जोतने” की प्रक्रिया है जो रटने की प्रवृत्ति को खत्म करती है।
मानसिक मजबूती और एकाग्रता: संवाद के दौरान पीएम ने एक मनोवैज्ञानिक पहलू साझा किया: “वर्तमान में जिएं।” उन्होंने तर्क दिया कि हम वही चीजें याद रखते हैं जिनमें हम पूरी तरह शामिल होते हैं। तनाव प्रबंधन के लिए उन्होंने ‘टाइम मैनेजमेंट’ और डायरी लेखन जैसी सरल आदतों पर जोर दिया।
सपनों का महत्व: लद्दाख के एक छात्र के प्रश्न पर पीएम ने कहा कि “सपना न देखना अपराध है।” उन्होंने सुझाव दिया कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए महापुरुषों की आत्मकथाएँ पढ़ें, ताकि यह समझ सकें कि संघर्ष ही सफलता की सीढ़ी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों के साथ बातचीत में जीवन और करियर से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। यहाँ उनके संबोधन के प्रमुख अंश दिए गए हैं:
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स्वयं के प्रति सच्चे रहें: सलाह सबकी सुनें, लेकिन बदलाव तभी करें जब आप खुद उसके लिए तैयार हों।
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संतुलन है जरूरी: पढ़ाई, खेल, नींद और अपने शौक (Hobbies) के बीच सही तालमेल ही विकास की चाबी है।
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अंकों का मोह छोड़ें: किसी को याद नहीं रहता कि पिछले साल किसने टॉप किया था, इसलिए अंकों के पीछे भागने के बजाय व्यक्तित्व विकास पर ध्यान दें।
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वर्तमान में जिएं: पिछला क्या हुआ उस पर समय बर्बाद न करें, आने वाले भविष्य और ‘आज’ पर ध्यान केंद्रित करें।
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गेमिंग और क्रिएटिविटी: गेमिंग को एक रचनात्मक कौशल की तरह देखें। भारतीय कहानियों (जैसे पंचतंत्र) पर आधारित गेम्स बनाएं।
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सहयोगात्मक शिक्षा: अपने से कमजोर छात्रों को पढ़ाएं और होशियार साथियों से सीखें। साझा शिक्षा सबको आगे बढ़ाती है।
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कठिनाई से न डरें: आराम से जीवन को आकार नहीं मिलता। विपरीत परिस्थितियाँ ही इंसान को मजबूत बनाती हैं।
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स्वदेशी का संकल्प: अपने घर और जीवन में विदेशी वस्तुओं की जगह भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दें।
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आत्मविश्वास का स्रोत: सच्चा आत्मविश्वास आंतरिक सच्चाई और कड़े अभ्यास से आता है।
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परीक्षा एक उत्सव: इसे बोझ न समझें, बल्कि एक त्योहार की तरह मनाएं।


