क्या है एपस्टीन फाइल्स और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का इस पर बयान? जानिए पूरे मामले के मुख्य तथ्य

लोकसभा में बुधवार को ‘एपस्टीन फाइल्स’ का मुद्दा गरमा गया। राहुल गांधी द्वारा निशाना साधे जाने के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस के सामने आकर अपनी स्थिति साफ की। राहुल गांधी ने अनिल अंबानी और एपस्टीन के संबंधों का जिक्र करते हुए पुरी का नाम बीच में घसीटा था।
विवाद की जड़: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर कुछ स्क्रीनशॉट साझा कर दावा किया है कि अनिल अंबानी ने मार्च 2017 में ट्रंप प्रशासन के करीबियों से मिलने के लिए एपस्टीन की मदद मांगी थी। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी एपस्टीन की सलाह पर काम किया था।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जेफ्री एपस्टीन मामले में खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है। इस विवाद के पीछे के प्रमुख तथ्य और बयान नीचे दिए गए हैं:
1. हरदीप पुरी का स्पष्टीकरण: पुरी के अनुसार, 2009 से 2017 के बीच उनके कार्यकाल के दौरान लाखों ईमेल की जांच में केवल 3-4 मुलाकातों का संदर्भ मिलता है। यह उस समय की बात है जब वे संयुक्त राष्ट्र में सक्रिय थे।
2. राहुल गांधी और कांग्रेस के दावे:
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अनिल अंबानी कनेक्शन: कांग्रेस का दावा है कि अंबानी ने ट्रंप के करीबियों (कुशनर और बैनन) से मिलने के लिए एपस्टीन से सहायता ली थी।
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स्टीव बैनन चैट: पवन खेड़ा ने एक चैट का हवाला दिया जिसमें एपस्टीन ने स्टीव बैनन से पीएम मोदी की मीटिंग को ‘दिलचस्प’ बताया था।
3. अन्य मुलाकातें: पुरी ने लिंक्डइन के संस्थापक के साथ अपनी बैठक को भी भारत में डिजिटल विकास और निवेश की चर्चा तक सीमित बताया। उन्होंने साफ किया कि उस समय वे एक निजी नागरिक के तौर पर अपनी विशेषज्ञता साझा कर रहे थे।



