कूनो से गांधी सागर तक चीतों की दहाड़: भारत में सफल रहा दुनिया का सबसे बड़ा वन्यजीव प्रयोग

भारत से विलुप्त हो चुके चीतों की वापसी अब एक सुखद वास्तविकता बन चुकी है। प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल प्रबंधन का परिणाम है कि आज कूनो और गांधी सागर अभयारण्य में चीतों की दूसरी पीढ़ी के शावक निर्भय होकर विचरण कर रहे हैं।
परियोजना की प्रमुख उपलब्धियां:
-
प्रजनन में सफलता: दक्षिण अफ्रीकी और नामीबियाई मूल के चीतों ने भारतीय जलवायु को पूरी तरह अपना लिया है। गामिनी, आशा, वीरा, निर्वा और मुखी जैसी मादा चीतों के शावक इस सफलता के जीवंत प्रमाण हैं।
-
विस्तार: कूनो के बाद अब गांधी सागर अभयारण्य चीतों का दूसरा घर बन गया है, जहाँ तीन दक्षिण अफ्रीकी चीते सफलतापूर्वक स्थानांतरित किए जा चुके हैं।
-
जन-भागीदारी: इस परियोजना ने 450 से अधिक ‘चीता मित्र’ तैयार किए हैं और स्थानीय स्तर पर सैकड़ों रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।
भविष्य की योजनाओं के तहत गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में एक संरक्षण प्रजनन केंद्र भी स्थापित किया जाएगा ताकि चीतों की आबादी को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाया जा सके।



