बजट प्रावधानों को जमीन पर उतारने के लिए पीएम मोदी का आह्वान; कृषि को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर आयोजित बजट-पश्चात वेबिनार को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण और इसे नई ऊर्जा से भरने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस वेबिनार से निकले सुझाव बजट के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायक सिद्ध होंगे।

मुख्य बिंदु:

  • वैश्विक मांग और निर्यात: पीएम ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारतीय खेती को ‘एक्सपोर्ट ओरिएंटेड’ (निर्यात उन्मुख) बनाना अनिवार्य है। भारत की विविध एग्रो-क्लाइमेटिक स्थितियों का लाभ उठाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैठ बनाने की रणनीति पर चर्चा होनी चाहिए।

  • उच्च मूल्य कृषि (High-Value Agriculture): इस साल के बजट में नारियल जैसी नकदी फसलों और नॉर्थ-ईस्ट की विशिष्ट फसलों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।

  • आर्थिक सुरक्षा: सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए पीएम ने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से 10 करोड़ किसानों के खातों में 4 लाख करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं। एमएसपी सुधारों और फसल बीमा योजना (2 लाख करोड़ रुपये के दावों का निपटान) ने किसानों के जोखिम को कम किया है।

प्रधानमंत्री ने हितधारकों से आग्रह किया कि वे बजट के ‘फुल पोटेंशियल’ का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए अपने अनुभव साझा करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि को भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा का एक “रणनीतिक स्तंभ” करार दिया है। बजट के बाद आयोजित विशेष वेबिनार में उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल खेती करना नहीं, बल्कि इसे वैश्विक व्यापार का केंद्र बनाना है।

रणनीतिक बदलाव:

  1. संस्थागत मजबूती: कृषि ऋण कवरेज को 75 प्रतिशत से अधिक कर दिया गया है, जिससे किसानों की साहूकारों पर निर्भरता कम हुई है।

  2. क्षेत्रीय विकास: केरल, तमिलनाडु और उत्तर-पूर्व के राज्यों की विशिष्ट भौगोलिक क्षमताओं का उपयोग करने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं।

  3. वित्तीय सुरक्षा जाल: एमएसपी में सुधार के कारण अब किसानों को लागत पर करीब डेढ़ गुना रिटर्न मिल रहा है, जो उनकी आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

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