बंगाल चुनाव परिणाम 2026: पारदर्शी मतगणना सुनिश्चित करने हेतु निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला, तैनात होंगे 242 विशेष पर्यवेक्षक

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की मतगणना को लेकर निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। चुनाव आयोग ने राज्य में शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से वोटों की गिनती पूरी करने के लिए 165 अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षकों और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की विशेष तैनाती की घोषणा की है। इस बड़ी प्रशासनिक तैनाती का मुख्य उद्देश्य मतगणना केंद्रों पर निगरानी को और अधिक सख्त बनाना है।
निर्वाचन आयोग की योजना के मुताबिक, अतिरिक्त पर्यवेक्षकों को उन विशिष्ट विधानसभा सीटों पर नियुक्त किया जाएगा जहाँ मतगणना के लिए एक से अधिक हॉल का उपयोग हो रहा है। पुलिस पर्यवेक्षकों की भूमिका विशेष रूप से केंद्रों की बाहरी सुरक्षा घेरे को मजबूत करने की होगी, हालांकि उन्हें मतगणना कक्ष के अंदर जाने की सख्त मनाही रहेगी। आयोग ने जोर देकर कहा है कि कानून-व्यवस्था की देखरेख केवल बाहरी परिसरों तक ही सीमित रहेगी ताकि गिनती की प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप न हो।
कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए आयोग ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20बी और संवैधानिक अनुच्छेद 324 के तहत संचालित की जा रही है। इसका अर्थ यह है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सभी कर्मी और पर्यवेक्षक सीधे तौर पर आयोग के अधीन कार्य करेंगे। तकनीकी सुरक्षा के लिहाज से इस बार प्रवेश द्वार पर केवल क्यूआर कोड आधारित डिजिटल पहचान पत्र ही मान्य होंगे, जिससे फर्जी प्रवेश पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सकेगी।
निष्पक्षता बनाए रखने के लिए डिजिटल उपकरणों पर भी कड़ाई बरती गई है। मतगणना हॉल के भीतर मोबाइल फोन का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा, जिसमें केवल गिने-चुने वरिष्ठ अधिकारियों को ही छूट दी गई है। इसके अलावा, वोटों की गिनती में किसी भी संदेह को दूर करने के लिए फॉर्म 17सी-II और कंट्रोल यूनिट के मिलान की अनिवार्य व्यवस्था की गई है। माइक्रो-ऑब्जर्वर प्रत्येक दौर की गिनती के बाद स्वतंत्र रूप से डेटा का सत्यापन करेंगे। बंगाल के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए आयोग का यह हस्तक्षेप स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव परिणामों की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।



