‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से बदलेगी प्रदेश की तस्वीर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर शुरू हुए जल संचय अभियान को मध्यप्रदेश ने एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गिरते भूजल स्तर और नदियों के कम होते प्रवाह को लेकर सरकार सजग है। उन्होंने केंद्र सरकार से वनों के रखरखाव के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहयोग की अपेक्षा की है, क्योंकि प्रदेश के वन ही नदियों के जल का मुख्य स्रोत हैं जो पड़ोसी राज्यों की अर्थव्यवस्था में भी योगदान देते हैं।
अभियान की विशेषताएं:
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शहरी एवं ग्रामीण विकास: खेत-तालाबों, सरोवरों के निर्माण के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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प्रदूषण नियंत्रण: नदियों को ‘निर्मल और अविरल’ बनाने के लिए उनमें गिरने वाले प्रदूषित नालों के शोधन की योजना बनाई गई है।
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जागरूकता: विद्यालयों में निबंध, चित्रकला और जल शपथ के माध्यम से नई पीढ़ी को जल बचाने का संकल्प दिलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने संकल्प व्यक्त किया कि प्रत्येक गाँव और शहर को जल सुरक्षा के लक्ष्य से जोड़ा जाएगा ताकि “गाँव का पानी गाँव में और खेत का पानी खेत में” के मंत्र को साकार किया जा सके।



