होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 778 भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित, ईरान ने दिया ‘सेफ पैसेज’ का भरोसा

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’, जहाँ से वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है, वहां भारत को विशेष प्राथमिकता मिलने जा रही है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने “दुश्मन देशों” को इस मार्ग का उपयोग नहीं करने देगा, लेकिन भारत जैसे मित्र देशों को जल्द ही सुरक्षित गलियारा (Safe Passage) प्रदान किया जाएगा।
ईरानी राजदूत ने युद्ध के बाद की परिस्थितियों में भारत द्वारा दी गई मदद की सराहना की है। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से यह आशंका जताई जा रही थी कि ईरान ने इस मार्ग पर बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं, जिससे वैश्विक व्यापार ठप होने का डर था। हालांकि, ईरान ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा कि मार्ग केवल युद्ध के कारण बंद था। भारत के लिए यह खबर इसलिए भी राहत भरी है क्योंकि क्षेत्र में भारतीय नाविकों और जहाजों की बड़ी संख्या मौजूद है और सुरक्षा की दृष्टि से यह मार्ग भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
फारस की खाड़ी में जारी अस्थिरता के बीच भारत सरकार और ईरान के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर बड़ी सहमति बनी है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने जानकारी दी है कि वर्तमान में होर्मुज स्ट्रेट के आसपास भारतीय झंडे वाले कुल 28 जहाज मौजूद हैं, जिन पर 778 भारतीय नाविक सवार हैं।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:
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होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में: 24 जहाज और 677 भारतीय नाविक।
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होर्मुज स्ट्रेट के पूर्व में: 4 जहाज और 101 भारतीय नाविक।
ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहली के आश्वासन के बाद अब इन जहाजों की सुरक्षित वापसी की उम्मीदें बढ़ गई हैं। डीजी शिपिंग द्वारा 28 फरवरी 2026 को जारी की गई सुरक्षा एडवाइजरी अब भी प्रभावी है। मंत्रालय स्थानीय प्रशासन और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर हर जहाज की स्थिति पर पल-पल की नजर रख रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में चिकित्सा या अन्य सहायता तुरंत पहुंचाई जा सके।



