भारतीय रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाई: डीआरडीओ ने 48 घंटों में किए तीन महत्वपूर्ण मिसाइल परीक्षण

भारत सरकार के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 10 और 11 जून 2026 को देश की रणनीतिक सुरक्षा को बढ़ाते हुए लगातार तीन महत्वपूर्ण फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए। यह सैन्य अभ्यास सुदूर दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड डिफेंस ग्रिड और मध्यम दूरी की एंटी-शिप युद्धक क्षमता को परखने के लिए आयोजित किया गया था।
इस सफल सैन्य परीक्षण के अंतर्गत मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) मैकेनिज्म का प्रदर्शन किया गया, जिसमें शामिल इंटरसेप्टर मिसाइलों ने तय किए गए दुश्मन के नकली लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नेस्तनाबूद कर दिया। आधुनिक युद्ध तकनीकों को ध्यान में रखकर बनाई गई यह प्रणाली नए दौर के हवाई खतरों को नाकाम करने में सक्षम है।
इस सामरिक सफलता के साथ ही भारत को अब उन विशिष्ट देशों की श्रेणी में स्थान मिल गया है, जो अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को भी बीच रास्ते में रोकने की क्षमता रखते हैं। इस स्वदेशी प्रणाली के जुड़ने से देश की सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था पहले से कई गुना अधिक मजबूत हो गई है।
इस रक्षा कार्यक्रम का एक और प्रमुख आकर्षण भारतीय नौसेना की मध्यम दूरी की एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का पहला उड़ान परीक्षण रहा, जो पूरी तरह सफल रहा। यह परीक्षण सागर में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और नौसेना की आक्रामक मारक क्षमता में विस्तार को रेखांकित करता है।
इस पूरे मिशन और परीक्षण प्रक्रिया का जायजा लेने के लिए डीआरडीओ और भारतीय सैन्य बलों के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर उपस्थित रहे। इस कामयाबी ने देश के भीतर विकसित की जा रही स्वदेशी तकनीकों और वैज्ञानिक संधान की उच्च गुणवत्ता को प्रमाणित किया है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों की टीम को बधाई संदेश भेजा। इसके साथ ही, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने इस पूरे परीक्षण की कमान संभाली और रक्षा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों तथा वैज्ञानिकों की साझी मेहनत को इस सफलता का श्रेय दिया।



