जन धन योजना के तहत 57 करोड़ से अधिक खाते खुले: वित्तीय समावेशन पर वित्त मंत्री की लोकसभा में विस्तृत रिपोर्ट

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में देश में वित्तीय समावेशन की स्थिति पर एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने सदन को सूचित किया कि प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत 25 फरवरी 2026 तक देश भर में कुल 57.78 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में जमा कुल राशि लगभग 2,94,702 करोड़ रुपए है।
वित्त मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस योजना ने महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कुल जन धन खातों में से 32.21 करोड़ यानी लगभग 55.8 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम पर हैं। इसके अतिरिक्त, वित्तीय सेवाओं की पहुंच गांवों तक बढ़ाने के उद्देश्य से, करीब 45.17 करोड़ खाते (78.2 प्रतिशत) ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं।
सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं: सीतारमण ने अन्य प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की प्रगति का भी उल्लेख किया (सभी आंकड़े 25 फरवरी 2026 तक):
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प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई): इस योजना के तहत, जो किसी भी कारण से मृत्यु होने पर 2 लाख रुपए का जीवन बीमा कवर प्रदान करती है, कुल 26.88 करोड़ लोगों ने नामांकन कराया है।
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प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई): इस दुर्घटना बीमा योजना के तहत 57.11 करोड़ नामांकन किए जा चुके हैं। यह योजना मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता पर 2 लाख रुपए और आंशिक स्थायी विकलांगता पर 1 लाख रुपए की सहायता प्रदान करती है।
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अटल पेंशन योजना (एपीवाई): पात्र लोगों को मासिक पेंशन प्रदान करने वाली इस योजना के तहत कुल 8.84 करोड़ लोगों ने नामांकन कराया है।
उद्यमिता और ऋण सहायता: वित्त मंत्री ने छोटे व्यवसायों और वंचित वर्गों के लिए ऋण सहायता योजनाओं की सफलता पर भी प्रकाश डाला:
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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई): छोटे और सूक्ष्म कारोबारों को बिना गारंटी के 20 लाख रुपए तक का कर्ज देने वाली इस योजना के तहत 57.26 करोड़ लोन मंजूर किए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 39.48 लाख करोड़ रुपए है।
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स्टैंड-अप इंडिया योजना (एसयूपीआई): अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई इस योजना के तहत, 31 मार्च 2025 तक 62,790 करोड़ रुपए के 2.75 लाख लोन दिए गए हैं।
जेएएम प्लेटफॉर्म और डीबीटी: वित्त मंत्री ने अंत में वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में जेएएम प्लेटफॉर्म (जन धन-आधार-मोबाइल) की भूमिका को रेखांकित किया। यह प्लेटफॉर्म जन धन खातों को आधार और मोबाइल नंबर से जोड़ता है, जिससे विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को कल्याणकारी योजनाओं के लाभ सीधे लोगों के खातों में पहुँचाने में मदद मिलती है, जिसे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) कहा जाता है।



