ऊर्जा संकट के बीच बड़ी कामयाबी: भारतीय एलपीजी टैंकर ने पार किया स्ट्रेट ओफ़ हॉर्मुज

ईरान और अमेरिका के मध्य जारी गंभीर गतिरोध के बीच भारत को ऊर्जा मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। लगभग 45,000 टन रसोई गैस (एलपीजी) से लदा टैंकर ‘सर्व शक्ति’ सफलतापूर्वक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर ओमान की खाड़ी में पहुंच चुका है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब सुरक्षा कारणों और अमेरिकी नाकाबंदी के चलते इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से व्यापारिक जहाजों का निकलना बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को इस टैंकर की लोकेशन ईरान के रणनीतिक द्वीपों के पास दर्ज की गई थी। ‘सर्व शक्ति’ एक मंझा हुआ मालवाहक जहाज है जो नियमित रूप से भारतीय बंदरगाहों और फारस की खाड़ी के बीच ईंधन का परिवहन करता है। वर्तमान यात्रा के दौरान, यह जहाज अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपनी पहचान और गंतव्य का निरंतर प्रसारण कर रहा है, जो युद्धग्रस्त या तनावपूर्ण क्षेत्रों में परिचालन के लिए अनिवार्य सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है।

यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हालिया अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद इस ऊर्जा गलियारे में जहाजों की आवाजाही न के बराबर रह गई थी। हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा है, और यहां किसी भी प्रकार का व्यवधान भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय रहा है। ‘सर्व शक्ति’ उन कुछ गिने-चुने बड़े जहाजों में से एक है, जिसने पिछले माह प्रतिबंधों में मिली संक्षिप्त राहत के दौरान इस मार्ग का उपयोग किया है।

वैश्विक शिपिंग डेटा बताते हैं कि क्षेत्र में नाकाबंदी के बावजूद व्यापारिक गतिविधियों को धीरे-धीरे बहाल करने की कोशिशें की जा रही हैं। इससे पहले मार्च महीने में ‘मुबाराज’ नामक एलएनजी टैंकर ने भी इसी मार्ग का अनुसरण किया था। वह जहाज कुछ समय तक ट्रैकिंग सिस्टम से ओझल रहने के बाद पुनः भारतीय समुद्री क्षेत्र के पास देखा गया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन टैंकरों का सुरक्षित पार होना इस बात का प्रमाण है कि भारत के ऊर्जा आपूर्ति मार्ग अभी भी कार्यात्मक हैं। हालांकि क्षेत्र में सैन्य तनाव बरकरार है, लेकिन आवश्यक ईंधन की खेपों का पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत है। भारत अब इन जहाजों की प्रगति पर बारीकी से नजर रख रहा है ताकि ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

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