आम आदमी की जेब पर दोहरी मार: थोक और खुदरा दोनों महंगाई बढ़ी, कच्चा तेल बढ़ा सकता है मुश्किलें

अगर आप सोच रहे हैं कि घर का बजट क्यों बिगड़ रहा है, तो सरकारी आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं। फरवरी में थोक महंगाई (WPI) 2.13% के 12 महीने के रिकॉर्ड स्तर पर है। इसका सीधा असर मैन्युफैक्चरिंग और फूड आइटम्स पर दिख रहा है।
बाजार का समीकरण: WPI में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी (64.23%) मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की होती है। जब थोक भाव लंबे समय तक ऊंचे रहते हैं, तो कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। वर्तमान में ईंधन और बिजली की थोक दर -4.01% से सुधरकर -3.78% हुई है, लेकिन वैश्विक तनाव इसे कभी भी बढ़ा सकता है।
महंगाई का गणित: भारत में महंगाई दो तरह से मापी जाती है। रिटेल महंगाई (CPI), जिसे ग्राहक सीधे चुकाता है, वह भी 3.21% पर पहुंच गई है। सरकार के पास महंगाई नियंत्रित करने के लिए टैक्स कटौती (जैसे एक्साइज ड्यूटी) का विकल्प होता है, लेकिन इसकी भी अपनी सीमाएं हैं।



