HDFC बैंक के चेयरमैन के इस्तीफे और ईरान युद्ध की आहट से सहमा दलाल स्ट्रीट; सेंसेक्स और निफ्टी 3% से ज्यादा लुढ़के

भारतीय शेयर बाजार के लिए 19 मार्च 2026 का दिन ‘ब्लैक थर्सडे’ साबित हुआ। भू-राजनीतिक तनाव और बैंकिंग क्षेत्र में मची उथल-पुथल के कारण बाजार में 22 महीने की सबसे भीषण गिरावट दर्ज की गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सूचकांक सेंसेक्स 2497 अंक (3.26%) गोता लगाकर 74,207 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 776 अंक (3.26%) फिसलकर 23,002 पर आ गया।
बाजार में गिरावट के मुख्य स्तंभ:
-
भू-राजनीतिक संकट: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों ने वैश्विक सप्लाई चेन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतें 6% उछलकर 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई बढ़ने और कॉरपोरेट मुनाफे में कमी आने की आशंका है।
-
वैश्विक बाजारों का दबाव: अमेरिकी बाजारों (डाउ जोन्स में 1.63% की गिरावट) और एशियाई बाजारों (निक्केई में 3.38% की भारी गिरावट) के नकारात्मक संकेतों ने भारतीय निवेशकों के सेंटिमेंट को बिगाड़ दिया।
-
HDFC बैंक का संकट: बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे और उनके द्वारा नैतिकता पर उठाए गए सवालों ने बैंकिंग सेक्टर में बिकवाली बढ़ा दी। HDFC बैंक का शेयर 5.11% गिरकर 800 रुपये पर बंद हुआ।
आर्थिक प्रभाव: इस गिरावट के कारण BSE में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 439 लाख करोड़ रुपये से घटकर 426 लाख करोड़ रुपये रह गया, जिसका अर्थ है कि निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में 13 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है।
सेक्टरवार प्रदर्शन: आज बाजार में सबसे ज्यादा मार बैंकिंग और ऑटो शेयर्स पर पड़ी। ईरान जंग शुरू होने के बाद से सेंसेक्स में अब तक 9% की गिरावट आ चुकी है। 27 फरवरी को जो सेंसेक्स 81,287 पर था, वह लगातार गिरते हुए आज 74,207 पर सिमट गया है। कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग (इंडियन बास्केट 146 डॉलर प्रति बैरल) ने ऑटोमोबाइल कंपनियों की लागत बढ़ने के डर से निवेशकों को शेयर बेचने पर मजबूर कर दिया।



