छोटे शहरों और सरकारी स्कूलों का बढ़ा दबदबा: यूपीएससी में एमपी के 61 चयन, दिल्ली-इंदौर जाकर तैयारी का मिथक टूटा

यूपीएससी 2025 के परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा अब केवल बड़े महानगरों की मोहताज नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सम्मान समारोह में अपर मुख्य सचिव (उच्च शिक्षा) श्री अनुपम राजन ने महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए।
बदलते रुझान के प्रमुख बिंदु:
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जमीनी सफलता: चयनित 61 अभ्यर्थियों में से 22 ऐसे हैं जिन्होंने सरकारी स्कूल और कॉलेजों से शिक्षा प्राप्त की है।
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छोटे शहरों का उदय: सोहागपुर और सिरोंज जैसे छोटे कस्बों के युवाओं ने भी इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता के झंडे गाड़े हैं।
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मिथक का अंत: अब यह धारणा खत्म हो रही है कि सिविल सेवा के लिए केवल दिल्ली या राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में जाना जरूरी है।
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अनुभव साझा: 5वीं रैंक प्राप्त ईशान भटनागर ने गवर्नेंस को संवैधानिक मूल्यों को धरातल पर लाने का माध्यम बताया, वहीं किसान की बेटी प्राची चौहान (260वीं रैंक) ने कहा कि धैर्य और ईमानदारी ही सफलता की कुंजी है।


