‘जनता पर बोझ न पड़े, इसलिए सरकार ने सहा घाटा’, तेल की कीमतों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बड़ा बयान

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है। संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बावजूद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन था कि इसका बोझ देश की जनता पर नहीं पड़ना चाहिए।
वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने दो मुख्य उद्देश्यों को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया: पहला, देश में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और दूसरा, कीमतों को स्थिर रखना। उन्होंने जानकारी दी कि रामनवमी के दिन इस पर गहन मंथन हुआ और अगले ही दिन संसद में इसकी घोषणा की गई।
विपक्ष द्वारा इस कदम को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताए जाने पर वित्त मंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह आलोचना ‘शर्मनाक’ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार यह बोझ खुद नहीं उठाती और तेल कंपनियों को राहत नहीं मिलती, तो जनता के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने लगते।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संभावित रुकावटों ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है। ऐसे में भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करता है, चुनौतियां दोगुनी थीं।
वित्त मंत्री के बयान से तीन बड़ी बातें निकलकर सामने आती हैं:
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सप्लाई चेन की सुरक्षा: एक्सपोर्ट करने वाली रिफाइनरियों पर अतिरिक्त टैक्स लगाकर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कंपनियां पहले घरेलू बाजार की जरूरतें पूरी करें।
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कंपनियों का घाटा और जनता की राहत: सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती कर उस घाटे का बोझ खुद उठाया है, जो अन्यथा तेल कंपनियां ग्राहकों से वसूलतीं।
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राजनैतिक इच्छाशक्ति: रामनवमी के दिन हुई हाई-लेवल मीटिंग और अगले ही दिन संसद में की गई घोषणा यह दर्शाती है कि सरकार इस मुद्दे पर कितनी सक्रिय है।
सरकार ने साफ किया है कि वर्तमान में देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार है और किसी भी प्रकार की किल्लत की अफवाहें निराधार हैं।



