श्रीअन्न से समृद्ध होंगे एमपी के किसान: जीआई टैग और सरकारी प्रोत्साहन से बदल रही है खेती की तस्वीर

मध्यप्रदेश में मोटे अनाज (मिलेट्स) अब केवल निर्वाह की खेती नहीं, बल्कि लाभ का व्यवसाय बनते जा रहे हैं। वैश्विक बाजार में श्रीअन्न की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने तीन स्थानीय किस्मों के लिए जीआई टैग की प्रक्रिया तेज कर दी है।
प्रमुख आर्थिक बिंदु:
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न्यूनतम प्रोत्साहन: राज्य सरकार कोदो-कुटकी पर 1,000 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त प्रोत्साहन दे रही है।
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ब्रांडिंग का लाभ: जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर द्वारा तैयार दस्तावेजों के आधार पर जीआई टैग मिलने से ‘सिताही कुटकी’ एक राष्ट्रीय ब्रांड के रूप में स्थापित होगी।
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आय में वृद्धि: डिंडोरी के 54 गांवों में जहां दूसरी रबी फसलें संभव नहीं हैं, वहां सिताही कुटकी से किसानों की आजीविका सुरक्षित हुई है।
नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर जैसी फसलों में छिपे औषधीय गुणों के कारण इनके निर्यात की संभावनाएं बढ़ गई हैं। जीआई टैग इन उत्पादों के लिए “क्वालिटी गारंटी” का काम करेगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और सीधा लाभ जनजातीय किसानों की जेब में जाएगा।

