विशाखापत्तनम में INS तारागिरी का कमीशनिंग, ब्रह्मोस और एयर डिफेंस सिस्टम से लैस; राजनाथ सिंह ने कहा—नौसेना की क्षमता होगी मजबूत

भारतीय नौसेना को शुक्रवार को एक बड़ी ताकत मिली, जब विशाखापत्तनम में INS तारागिरी को औपचारिक रूप से शामिल किया गया। इस समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि देश में किसी भी तरह की आपदा या संकट की स्थिति में, चाहे वह राहत एवं बचाव कार्य हो या मानवीय सहायता, भारतीय नौसेना हमेशा अग्रणी भूमिका निभाती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस युद्धपोत के शामिल होने से नौसेना की ताकत में और वृद्धि होगी।

INS तारागिरी का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड ने प्रोजेक्ट 17-ए के अंतर्गत किया है। यह आधुनिक स्टेल्थ युद्धपोत अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित है, जिसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, एमएफ-स्टार रडार और मीडियम रेंज सर्फेस-टू-एयर मिसाइल (MR-SAM) एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।

इसके अलावा, जहाज में 76 मिमी की गन, 30 मिमी और 12.7 मिमी के क्लोज-इन वेपन सिस्टम भी लगे हैं। यह एंटी-सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो जैसी क्षमताओं से भी लैस है। इसी दौरान भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी ‘अरिदमन’ को भी नौसेना में शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई।

INS तारागिरी, नीलगिरी क्लास (प्रोजेक्ट 17A) का चौथा युद्धपोत है। इस क्लास के तहत कुल सात स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन युद्धपोतों को भविष्य की समुद्री चुनौतियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

‘तारागिरी’ नाम पहले भी एक युद्धपोत को दिया गया था, जिसने 1980 से 2013 तक भारतीय नौसेना में 33 वर्षों तक सेवा दी थी। नया INS तारागिरी उस पुराने जहाज का उन्नत संस्करण है, जिसमें स्टेल्थ तकनीक, बेहतर मारक क्षमता, आधुनिक ऑटोमेशन और अधिक सर्वाइवेबिलिटी जैसे फीचर्स शामिल किए गए हैं।

इस युद्धपोत का डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है। प्रोजेक्ट 17-ए के तहत बनाए जा रहे जहाजों में पहले की शिवालिक (P-17) क्लास की तुलना में अधिक उन्नत हथियार और सेंसर लगाए गए हैं।

पिछले 11 महीनों में यह इस प्रोजेक्ट का चौथा जहाज है जो नौसेना को मिला है। पहले दो जहाजों के निर्माण से मिले अनुभव के कारण INS तारागिरी का निर्माण समय घटाकर 81 महीने कर दिया गया, जबकि पहले जहाज INS नीलगिरि को बनने में 93 महीने लगे थे। इस प्रोजेक्ट के शेष तीन युद्धपोत अगस्त 2026 तक चरणबद्ध तरीके से नौसेना को सौंपे जाएंगे।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस परियोजना में करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है और इसमें 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) जुड़े हुए हैं।

समारोह के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ‘अरिदमन’ को शक्ति का प्रतीक बताया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन के नौसेना में शामिल होने के संकेत दिए हैं।

INS अरिदमन एक परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बी है, जो परमाणु मिसाइल दागने में सक्षम है। इससे पहले INS अरिहंत (2016) और INS अरिघात (अगस्त 2024) को भी भारतीय नौसेना में शामिल किया जा चुका है।

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