वाराणसी में ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य का भव्य शुभारंभ, सुशासन और सांस्कृतिक एकता पर जोर

वाराणसी (काशी) में आयोजित तीन दिवसीय ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के प्रतीक हैं और उनके जीवन से आज की पीढ़ी को प्रेरणा मिल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुशासन की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्र के प्रति उनके योगदान के लिए वे अभिनंदन के पात्र हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि बदलते समय में दो राज्यों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए इस तरह के आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना जैसी महत्वपूर्ण योजना दोनों राज्यों को मिली है, जिससे सिंचाई, कृषि उत्पादन और पेयजल आपूर्ति को मजबूती मिलेगी। उन्होंने इसे सुशासन का उदाहरण बताते हुए कहा कि इससे राज्यों के बीच सहयोग बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के राष्ट्र प्रेम, पराक्रम, न्यायप्रियता और प्रजा-हितकारी नीतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में यह महानाट्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस नाटक के माध्यम से न केवल इतिहास को जीवंत किया जा रहा है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभाशाली लोग मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे समाज को एक आदर्श शासक के गुणों की जानकारी मिल रही है।

डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर एक करोड़ एक लाख रुपए का अंतर्राष्ट्रीय सम्मान स्थापित किया है। इसके साथ ही 21 लाख रुपए का राष्ट्रीय और 5-5 लाख रुपए के तीन राज्य स्तरीय पुरस्कार भी शुरू किए गए हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2024 में आयोजित विक्रमोत्सव को महाद्वीप स्तरीय वॉव अवॉर्ड और ईमैक्स ग्लोबल अवॉर्ड प्राप्त हुआ है।

योगी आदित्यनाथ ने बताया ऐतिहासिक क्षण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन को ऐतिहासिक और यादगार बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करता है और काशी को उज्जैन से सांस्कृतिक रूप से जोड़ता है। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य और राजा भर्तृहरि की जोड़ी का उल्लेख करते हुए उनके आध्यात्मिक और ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास कर रहा है और भारत की ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान मिली है। योग और आयुर्वेद की बढ़ती स्वीकृति इसका उदाहरण है। उन्होंने 2024 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

वैदिक घड़ी का विशेष उपहार

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने योगी आदित्यनाथ को वैदिक घड़ी भेंट की। यह घड़ी प्राचीन वैदिक समय गणना और आधुनिक विज्ञान का संगम है, जो परंपरा को वर्तमान से जोड़ने का प्रयास है।

महानाट्य ने जीवंत किया स्वर्णिम इतिहास

‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य के मंचन ने दर्शकों को प्राचीन भारत के स्वर्णिम युग की अनुभूति कराई। नाटक की शुरुआत सम्राट के उस संकल्प से होती है, जिसमें वे विदेशी आक्रांताओं से मातृभूमि को मुक्त कराने का प्रण लेते हैं। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय, भव्य सेट, प्रकाश और संगीत ने हर दृश्य को जीवंत बना दिया।

युद्ध के दृश्यों में हाथी, घोड़े और ऊंटों का प्रयोग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। लगभग 400 कलाकारों ने आधुनिक तकनीक के साथ सम्राट के शौर्य, न्याय और विक्रम संवत की स्थापना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। ‘सिंहासन बत्तीसी’ और प्रजा के बीच जाकर उनकी समस्याओं को जानने वाले प्रसंगों ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

दर्शकों की भारी भीड़, गूंजे जयकारे

महानाट्य के पहले दिन भारी संख्या में दर्शक और पर्यटक पहुंचे। कार्यक्रम स्थल दर्शकों से खचाखच भर गया और ‘जय महाकाल’ तथा ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। अंतिम दृश्य में सम्राट के राज्याभिषेक के साथ पुष्प वर्षा ने पूरे वातावरण को भावनात्मक बना दिया।

विशेष आकर्षण और प्रदर्शनी

कार्यक्रम स्थल पर मध्यप्रदेश के संस्कृति और पर्यटन विभाग द्वारा भव्य चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है, जिसमें वैदिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया गया है। महानाट्य में तीन विशाल मंच बनाए गए हैं, जिनमें उज्जैन के महाकाल मंदिर की प्रतिकृति भी शामिल है।

इस प्रस्तुति में 18 घोड़े, दो रथ, चार ऊंट, एक हाथी और पालकी के साथ जीवंत दृश्य दिखाए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक, आतिशबाजी और पारंपरिक तत्वों के संयोजन ने इस महानाट्य को और भी आकर्षक बना दिया है।

यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है, बल्कि भारतीय इतिहास और परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

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