लोकसभा में देर रात तक चली नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बहस, महिला आरक्षण से जुड़े तीन विधेयकों पर व्यापक चर्चा

संसद के लोकसभा सदन में महिलाओं के प्रतिनिधित्व से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर देर रात तक गहन चर्चा जारी रही। नारी शक्ति वंदन अधिनियम, संविधान संशोधन और परिसीमन से संबंधित तीन अहम विधेयकों पर सांसदों ने विस्तृत विचार-विमर्श किया। इस दौरान कई बार सदन की कार्यवाही का समय बढ़ाया गया, जिससे अधिकाधिक सांसद अपनी बात रख सकें। देर रात तक बड़ी संख्या में सांसद उपस्थित रहे और सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लेते रहे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विशेष रूप से महिला सांसदों की उल्लेखनीय उपस्थिति और भागीदारी की सराहना की।
प्रारंभ में सदन की कार्यवाही रात 11 बजे तक निर्धारित थी, लेकिन चर्चा की गंभीरता को देखते हुए इसे पहले 12 बजे, फिर 1 बजे और अंततः सभी इच्छुक सदस्यों के बोलने तक जारी रखा गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान सांसद लगातार विधेयकों पर अपने विचार व्यक्त करते रहे। इस दौरान स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के प्रति महिलाओं की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, क्योंकि इतनी देर रात तक बड़ी संख्या में महिला सांसद सदन में मौजूद रहीं। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि आज सदन में महिलाओं की उपस्थिति पुरुषों की तुलना में अधिक दिखाई दे रही है।
17 अप्रैल को रात 1:20 बजे लोकसभा की कार्यवाही को अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया, जिसकी घोषणा स्वयं स्पीकर ने की।
इस महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 अप्रैल को लोकसभा में अपना संबोधन दिया। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के कई प्रमुख नेताओं ने विधेयकों पर अपने विचार रखे। चर्चा में गृह मंत्री अमित शाह, प्रियंका गांधी, कंगना रनौत, केसी वेणुगोपाल और असदुद्दीन ओवैसी सहित अनेक सांसदों ने भाग लिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक पर हो रही बहस को एक ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश को नई दिशा प्रदान करेगी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस दिशा में पहले जो समय व्यर्थ गया है, उसकी भरपाई अब की जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने देश की ‘नारी शक्ति’ को नमन करते हुए कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना अत्यंत आवश्यक है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस पहल का विरोध करने वालों को नकारात्मक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक विकसित भारत का निर्माण केवल भौतिक अवसंरचना या आर्थिक प्रगति से नहीं होगा, बल्कि इसमें महिलाओं की समान भागीदारी भी अनिवार्य है। सरकार की नीतियां ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर आधारित हैं।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी केवल संख्यात्मक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। उन्होंने बताया कि देश की लगभग 6700 ब्लॉक पंचायतों में से करीब 2700 का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं, जो उनके नेतृत्व कौशल और योगदान का प्रमाण है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन देशों ने तेजी से प्रगति की है, उनमें महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, और भारत को भी इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
अंत में प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि इस कानून को लागू करते समय किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व में किए गए परिसीमन और उससे जुड़े अनुपात में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, जिससे सभी राज्यों के हित सुरक्षित रहेंगे।



