ट्रंप का बयान: समझौता होने तक ईरान पर दबाव जारी रहेगा, अमेरिकी सेना की मौजूदगी बनी रहेगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान एक अहम अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए तैयार हो गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी बड़े समझौते के अंतिम रूप लेने तक अमेरिका अपनी सैन्य और रणनीतिक दबाव की नीति जारी रखेगा। यह बयान उन्होंने एरिजोना में टर्निंग पॉइंट यूएसए के कार्यक्रम में दिया।

ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब पूरी तरह से खुल चुका है और व्यापारिक गतिविधियों के लिए उपलब्ध है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां तनाव में कमी के संकेत सामने आए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी सेना क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए रखेगी और ईरान के साथ पूर्ण समझौता होने तक नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। उनके अनुसार, जब तक समझौते पर पूरी तरह हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक यह दबाव खत्म नहीं होगा।

अपने संबोधन में ट्रंप ने ‘न्यूक्लियर डस्ट’ को अमेरिका वापस लाने की योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह सामग्री ईरान में पहले हुए अमेरिकी हमलों का अवशेष है और इसे वापस लाने के लिए संयुक्त खुदाई अभियान चलाया जा सकता है।

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के हालिया प्रयासों से क्षेत्रीय स्तर पर तनाव कम हुआ है। उन्होंने कहा कि इजरायल और लेबनान के बीच एक अभूतपूर्व युद्धविराम हुआ है, जो पिछले 78 वर्षों में नहीं देखा गया। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत के सहयोग की भी उन्होंने सराहना की।

यूरोपीय सहयोगियों की आलोचना करते हुए उन्होंने नाटो की उपयोगिता पर सवाल उठाए और कहा कि अमेरिका को अपनी ताकत पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने विश्व की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति का निर्माण किया है और आगे की रणनीति में आत्मनिर्भरता पर जोर रहेगा।

ट्रंप ने अपने भाषण में कई वैश्विक संघर्षों को समाप्त कराने का श्रेय भी लिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक आठ युद्ध खत्म कराए हैं और भविष्य के समझौतों के बाद यह संख्या बढ़ सकती है। उनके अनुसार, यदि ईरान और लेबनान से जुड़े मुद्दों को शामिल किया जाए, तो समाप्त हुए संघर्षों की संख्या दस तक पहुंच सकती है।

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