एमटी सेट्टेबेलो पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर भारत सख्त, अमेरिकी राजनयिक तलब; 3 भारतीय नाविक अब भी लापता

ओमान के तट के पास पलाऊ के ध्वज वाले तेल टैंकर ‘एमटी सेट्टेबेलो’ पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा किए गए हमले पर भारत ने सख्त रुख अख्तियार किया है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने बुधवार को अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को तलब करके इस घटना में भारतीय नाविकों के हताहत होने तथा उनकी सुरक्षा को लेकर कड़ा विरोध प्रकट किया। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने अमेरिकी पक्ष के समक्ष भारतीय चालक दल के सदस्यों के जीवन और कल्याण को लेकर देश की गंभीर चिंताओं को पुरजोर तरीके से रखा।
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड का आरोप है कि उक्त तेल टैंकर ईरान से तेल परिवहन पर लगाए गए प्रतिबंधों और नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था। अमेरिकी सेना के अनुसार, चालक दल को कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन निर्देशों का पालन न करने पर सटीक मार करने वाले हथियारों से जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया गया ताकि उसे आगे बढ़ने से रोका जा सके। CENTCOM ने स्पष्ट किया कि 9 जून की रात 11:14 बजे ओमान की खाड़ी में की गई यह कार्रवाई लगातार दूसरे दिन की सैन्य मुस्तैदी का हिस्सा थी।
प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा, “दुनिया भर के समुद्री क्षेत्रों सहित फारस की खाड़ी और पश्चिम एशिया में भारतीय नाविकों की बहुत बड़ी हिस्सेदारी है। उनके हितों और भलाई की रक्षा करना हमारे लिए सबसे ऊपर है।” उन्होंने जानकारी दी कि इस संबंध में भारतीय दूतावास और नौवहन मंत्रालय लगातार जमीनी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
अमेरिकी राजनयिक के समक्ष उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने कहा, “हमने अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को बुलाकर इस हमले पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है और एक मजबूत विरोध दर्ज कराया है।” उन्होंने कहा कि भारत का यह स्पष्ट संदेश है कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है और क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर होने वाले ऐसे हमलों को तुरंत रोका जाना चाहिए। भारत का मानना है कि विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद और कूटनीति ही सही रास्ता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान में ओमान तट के पास हुए इस हमले की निंदा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित वाणिज्यिक पोत पर 24 भारतीय नागरिक तैनात थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया है, परंतु 3 नाविक अब भी लापता हैं। ओमान में भारतीय राजनयिक मिशन लापता भारतीयों की तलाश के लिए स्थानीय ओमानी प्रशासन और बचाव दलों के साथ निरंतर संपर्क में है।
अमेरिकी सैन्य कमान (CENTCOM) ने अपने रक्षात्मक बयान में कहा कि 13 अप्रैल को शुरू हुई इस नाकेबंदी के बाद से नियमों की अनदेखी करने वाले 8 जहाजों पर कार्रवाई की गई है, 134 जहाजों के मार्गों को परिवर्तित किया गया है और मानवीय मदद से जुड़े 42 जहाजों को मार्ग दिया गया है। भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि यह स्थिति क्षेत्रीय संघर्षों का परिणाम है। भारत ने तनाव को कम करने, कूटनीतिक समाधान तलाशने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में सुरक्षित नौवहन की बहाली की आवश्यकता पर बल दिया है।



