आईएमएफ का आकलन: भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत, लेकिन ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से जोखिम

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि का दृष्टिकोण अभी भी मजबूत बना हुआ है, हालांकि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। आईएमएफ के एशिया एवं प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने स्प्रिंग मीटिंग्स के दौरान आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि आईएमएफ ने भारत के विकास अनुमान में 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी की है। उनके अनुसार, 2026 की शुरुआत में अर्थव्यवस्था में अच्छा मोमेंटम देखने को मिला, जिसने इस संशोधन में योगदान दिया। साथ ही टैरिफ में 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने से आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिला है।
आईएमएफ ने यह भी उल्लेख किया कि पहले किए गए कर सुधारों का लाभ भारत को मिल रहा है, जिससे घरेलू मांग को मजबूती मिली और आर्थिक विकास को सहारा मिला। श्रीनिवासन के मुताबिक, इन कारकों ने मिलकर अर्थव्यवस्था को स्थिर गति प्रदान की है।
हालांकि, उन्होंने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को एक प्रमुख जोखिम बताया। उनका कहना था कि यदि यह संकट लंबा चलता है और तेल-गैस के दायरे से आगे बढ़ता है, तो भारत सहित अन्य एशियाई देशों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। भारत ऊर्जा के लिए आयात पर काफी निर्भर है, ऐसे में कीमतों में वृद्धि महंगाई को बढ़ा सकती है और बाहरी आर्थिक संतुलन पर दबाव डाल सकती है।
नीतिगत मोर्चे पर आईएमएफ ने भारत की वित्तीय नीति को संतुलित बताया। श्रीनिवासन ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में मजबूत वित्तीय बफर तैयार किए हैं, जो आवश्यकता पड़ने पर सहारा दे सकते हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि वैश्विक परिस्थितियां और बिगड़ती हैं, तो इसका असर सभी देशों पर पड़ेगा, जिसमें भारत भी शामिल है।
आईएमएफ ने क्षेत्रीय स्तर पर अपनी सामान्य सलाह दोहराते हुए कहा कि सरकारों को बाजार संकेतों को काम करने देना चाहिए, साथ ही कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। जरूरतमंदों को सीमित अवधि के लिए लक्षित सहायता प्रदान करने पर जोर दिया गया है।
रेमिटेंस के संदर्भ में आईएमएफ ने कहा कि भारत के लिए यह अभी भी एक मजबूत सहारा बना हुआ है। श्रीनिवासन ने बताया कि विदेशों, विशेष रूप से मिडिल ईस्ट में काम कर रहे भारतीय और एशियाई कामगारों से आने वाला धन प्रवाह स्थिर है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में पुनर्निर्माण कार्यों से रेमिटेंस को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।



