ऋण वसूली में तेजी लाने के लिए सरकार सख्त, डीआरटी को प्रक्रियाओं में सुधार और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के निर्देश

केंद्र सरकार ने बकाया ऋणों की वसूली की प्रक्रिया को गति देने के लिए ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) से कार्यप्रणाली में सुधार करने का आह्वान किया है। नई दिल्ली में वित्त मंत्रालय द्वारा आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान, सरकार ने डीआरटी को लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण हेतु ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वित्तीय संस्थानों के फंसे हुए कर्ज को वापस लाने की व्यवस्था को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाना था।
मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, डीआरटी को उन ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ (सर्वोत्तम प्रथाओं) को अपनाने के लिए कहा गया है, जिनका पालन बेहतर प्रदर्शन करने वाले न्यायाधिकरण कर रहे हैं। चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि बैंकों को अपने आंतरिक निरीक्षण और निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करना चाहिए। साथ ही, अधिक मूल्य वाले ऋण वसूली मामलों को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाने का सुझाव दिया गया ताकि वसूली के परिणामों में गुणात्मक सुधार आ सके।
प्रक्रियात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, सरकार ने लोक अदालतों के व्यापक उपयोग की वकालत की है। मंत्रालय का मानना है कि लोक अदालतें विवाद समाधान के एक प्रभावी वैकल्पिक माध्यम के रूप में डीआरटी की कार्यक्षमता को बढ़ा सकती हैं। हाल के आंकड़ों के अनुसार, बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और लक्षित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कारण डीआरटी की मासिक निपटान दरों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है।
ऋण वसूली की दक्षता बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया गया है। इसी कड़ी में पिछले वर्ष सितंबर में वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) के सहयोग से एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में डीआरटी के पीठासीन अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया, ताकि विवादों को सुलझाने की उनकी निर्णय क्षमता में सुधार किया जा सके।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को मध्यस्थता की अवधारणा और पारंपरिक न्यायिक प्रक्रियाओं की तुलना में इसके लाभों से अवगत कराया गया। मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान समय में आपसी सहमति से विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी प्रक्रिया माना जा रहा है। इन सत्रों में बातचीत की रणनीतियों, संचार तकनीकों और मध्यस्थों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिससे कानूनी जटिलताओं को कम कर ऋण वसूली को सरल बनाया जा सके।



