अंतरिक्ष में भारत की निजी छलांग: ‘दृष्टि’ उपग्रह सफल लॉन्च, ऑप्टिकल और रडार तकनीक के संगम से बदलेगी इमेजिंग की दुनिया

भारत के स्पेस-टेक स्टार्टअप गैलेक्सआई ने रविवार को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में अपनी धाक जमाते हुए ‘दृष्टि’ उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में भेजे गए इस 190 किलो वजनी उपग्रह ने भारत के सबसे बड़े निजी सैटेलाइट होने का गौरव हासिल कर लिया है। यह मिशन न केवल गैलेक्सआई के लिए बल्कि भारत की निजी अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
तकनीकी रूप से ‘दृष्टि’ वैश्विक मानकों को चुनौती दे रहा है। आमतौर पर उपग्रह या तो मल्टी-स्पेक्ट्रल (ऑप्टिकल) इमेजिंग करते हैं या रडार तकनीक (SAR) पर आधारित होते हैं। गैलेक्सआई ने इन दोनों प्रणालियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत कर ‘Opto-SAR’ नाम की नई श्रेणी विकसित की है। इससे उपग्रह को वह क्षमता मिलती है जो ऑप्टिकल तस्वीरों की स्पष्टता और रडार की हर मौसम में काम करने की शक्ति को एक साथ जोड़ती है। यह बहुआयामी दृष्टिकोण रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
मिशन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कंपनी ने बताया कि यह उपग्रह आपदा प्रबंधन और समुद्री निगरानी में इसरो के प्रयासों को और अधिक विस्तार देगा। संस्थापक सुयश सिंह ने स्पष्ट किया कि ‘दृष्टि’ का विकास विशेष रूप से भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है। भारत में बादलों की स्थिति और विविध मौसम के कारण पारंपरिक उपग्रहों से डेटा जुटाना कठिन होता था, लेकिन ‘दृष्टि’ की एकीकृत तकनीक से अब एक ही लोकेशन की सटीक और वास्तविक समय (Real-time) की जानकारी मिलना संभव होगा।
परियोजना की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों ने बताया कि सबसे जटिल कार्य ऑप्टिकल और रडार सेंसरों को एक ही बिंदु पर केंद्रित करना था, क्योंकि दोनों का देखने का कोण अलग होता है। कंपनी ने ऐसी उन्नत तकनीक विकसित की है जिससे ये दोनों सेंसर एक साथ काम कर सकें। इसके अतिरिक्त, यदि मौसम प्रतिकूल हो, तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रयोग से रडार डेटा को समझने योग्य दृश्यों में परिवर्तित किया जा सकेगा, जिससे चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित होगी। यह नवाचार भारत को वैश्विक उपग्रह इमेजिंग बाजार में एक अग्रणी स्थान दिला सकता है।



