इंडिया से भारत की ओर बढ़ते कदम ऐतिहासिक: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘इंडिया से भारत : एक प्रवास’ पुस्तक का किया विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित एक गरिमामय समारोह में प्रसिद्ध लेखक श्री प्रशांत पोल की नई पुस्तक “इंडिया से भारत : एक प्रवास” का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने ‘इंडिया’ से ‘भारत’ बनने की दिशा में कई अविस्मरणीय और गौरवशाली पड़ाव पार किए हैं। कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह के पदाधिकारी, मंत्रिमंडल के सदस्य और प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
पुस्तक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. यादव ने बताया कि इसकी भूमिका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने लिखी है। मुख्यमंत्री ने लेखक प्रशांत पोल के कठिन परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से 2026 तक का कालखंड राष्ट्र के इतिहास में ‘स्वर्णिम काल’ के रूप में दर्ज होगा। उन्होंने विंग कमांडर अभिनंदन की पड़ोसी देश से ससम्मान वापसी का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं राष्ट्र की बढ़ती शक्ति का प्रतीक हैं।
न्याय व्यवस्था और सांस्कृतिक एकता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के फैसले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के निर्णय के बाद पूरे देश ने समरसता का परिचय देते हुए इसका स्वागत किया, यहाँ तक कि विरोध करने वाले भी समारोह में शामिल हुए। उन्होंने वंदे मातरम् की गरिमा की बहाली और कोरोना काल में वैश्विक स्तर पर भारत द्वारा किए गए मैत्री सहयोग को सशक्त भारत के निर्माण का आधार बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे टीवी-9 भारतवर्ष के निदेशक हेमंत शर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना और राम-कृष्ण पथ का विकास सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में ठोस कदम हैं। वहीं पुस्तक के लेखक प्रशांत पोल ने अपने संबोधन में बताया कि पुस्तक के 11 अध्यायों में यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि भारत कभी भी लाचार नहीं था, बल्कि पिछले 12 वर्षों में इसे पुन: अपनी पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण कार्य हुआ है।
समारोह के अंत में मुख्यमंत्री को दो महत्वपूर्ण अध्ययन ग्रंथ भेंट किए गए। इनमें सुशासन और सूचना के अधिकार पर आधारित ‘मध्यप्रदेश पॉलिसी रिसर्च एंड एनालिसिस लीग’ का प्रकाशन और ‘युवा मंथन: सोच सरोकार और संभावनाएं’ नामक शोध ग्रंथ शामिल थे। इस दौरान विद्या भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कान्हेरे और प्रभात प्रकाशन के राकेश सिंह सहित कई गणमान्य जन उपस्थित थे।


