मध्य प्रदेश में कृषि क्रांति: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गिनाईं ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ की उपलब्धियां, अन्नदाता हो रहे सशक्त

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के दौरान कृषि विभाग द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा है कि राज्य सरकार ने अन्नदाता को परंपरा से लेकर आधुनिक तकनीक तक हर मोर्चे पर मजबूत किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), भावांतर योजना, श्रीअन्न प्रोत्साहन और डिजिटल नवाचारों के समन्वय से किसान अब अपनी लागत घटाकर आय बढ़ाने और आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर हैं।
उपार्जन और स्लॉट बुकिंग की बढ़ी समय सीमा किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं खरीदी हेतु स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दी है। प्रदेश में गेहूं के साथ-साथ चना और मसूर का उपार्जन भी 30 मार्च से 28 मई 2026 तक किया जा रहा है। इसके अलावा, ग्रीष्मकालीन उड़द के रकबे को बढ़ाने के लिए सरकार ने समर्थन मूल्य के ऊपर 600 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
भावांतर और श्रीअन्न प्रोत्साहन से सीधा लाभ आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सोयाबीन उत्पादक 7.10 लाख पंजीकृत किसानों को भावांतर भुगतान योजना के तहत 1476 करोड़ रुपये की राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की गई है। साथ ही, ‘रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना’ के माध्यम से कोदो-कुटकी उत्पादकों को क्रय मूल्य के अलावा 1000 रुपये प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसका उद्देश्य मोटे अनाज की मूल्य श्रृंखला विकसित करना और किसानों के मुनाफे को बढ़ाना है।
भंडारण क्षमता में विस्तार और मुफ्त ग्रेडिंग सुविधा खाद्यान्न को सुरक्षित रखने के लिए राज्य में 3.55 लाख मीट्रिक टन की नई भंडारण क्षमता विकसित की गई है, जबकि 15 लाख मीट्रिक टन क्षमता के आधुनिक गोदाम निर्माणाधीन हैं। किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाने के लिए 50 कृषि मंडियों में ग्रेडिंग, सॉर्टिंग और पैकेजिंग संयंत्र लगाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि किसान अपनी उपज की ग्रेडिंग और पैकेजिंग यहाँ निःशुल्क करा सकेंगे, जिससे बाजार में उन्हें अधिक मूल्य मिल सके।
डिजिटल खेती और कृषि यंत्रीकरण पर जोर मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश के सभी जिलों में ‘ई-किसान’ प्रणाली लागू कर दी गई है, जिससे उर्वरक वितरण में पारदर्शिता आई है और बिचौलियों का प्रभाव खत्म हुआ है। कृषि यंत्रीकरण के लिए आगामी 5 वर्षों हेतु 2868 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। प्रदेश में 5,629 कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित कर मध्य प्रदेश देश में अग्रणी बन गया है। साथ ही, 1,000 से अधिक ड्रोन संचालक तैयार किए गए हैं और पराली प्रबंधन के लिए फसल अवशेष आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।


