ओस्लो में मिले भारत और डेनमार्क के प्रधानमंत्री; ‘गिफ्ट सिटी’ निवेश, जल प्रबंधन और सुरक्षा परिषद पर हुआ मंथन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के मंच पर डेनमार्क की कार्यवाहक प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इस रणनीतिक मुलाकात में दोनों देशों के साझा एजेंडे और आपसी संबंधों में हुए सुधारों की व्यापक समीक्षा की गई। दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने भविष्य में हरित रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

पर्यावरण के मोर्चे पर दोनों देशों के बीच हुए विकास कार्यों का स्वागत करते हुए नेताओं ने हरित रणनीतिक साझेदारी की सराहना की। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करना और पर्यावरण संरक्षण के जरिए दोनों समाजों में टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है। साल 2020 में इस पहल की रूपरेखा तैयार होने के बाद से ही दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर संपर्क और सहयोग का सिलसिला जारी है।

तकनीकी और रक्षा क्षेत्र में सहयोग का दायरा बढ़ाते हुए दोनों देशों ने अत्याधुनिक तकनीकों, संचार प्रणालियों, उच्च स्तरीय अनुसंधान, और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। साथ ही, दोनों देशों के शैक्षणिक संस्थानों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने तथा रक्षा व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्रों में मिलकर काम करने की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई।

व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से पीएम मोदी ने डेनमार्क के उद्योग जगत को गुजरात की फिंटेक सिटी ‘गिफ्ट सिटी’ में निवेश करने और अपने कार्यालय स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की विकास दर बेहद तीव्र है और भारतीय बाजार अपनी जरूरतों के लिए डेनमार्क की पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाने के लिए तत्पर है।

गंगा और अन्य नदियों की स्वच्छता के संदर्भ में, दोनों नेताओं ने जल प्रबंधन की प्रगति पर संतोष जताया। इस दौरान वाराणसी में स्थापित की जा रही ‘स्वच्छ नदियों पर स्मार्ट प्रयोगशाला’ (SLCR) का विशेष रूप से जिक्र किया गया, जो कि भारत सरकार, आईआईटी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और डेनमार्क सरकार के आपसी सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है।

इस उच्च स्तरीय बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के समसामयिक विषयों पर भी गहराई से चर्चा हुई। बातचीत के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बतौर अस्थायी सदस्य डेनमार्क की मौजूदा भूमिका और उसके सफल कार्यकाल के लिए डेनमार्क की कार्यवाहक प्रधानमंत्री को अपनी शुभकामनाएं दीं।

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