कौशल विकास योजनाओं से संवर रहा महिलाओं का भविष्य, तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में बेटियों ने गाड़े सफलता के झंडे

मध्य प्रदेश की बेटियां आज नई ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ विकास की राह पर अग्रसर हैं। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग द्वारा क्रियान्वित की जा रही विभिन्न योजनाओं की बदौलत महिलाओं को उत्कृष्ट प्रशिक्षण और रोजगार के बेहतर विकल्प प्राप्त हो रहे हैं। इसी का प्रतिफल है कि महिलाएं अब भारी संख्या में तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों की ओर रुख कर रही हैं। यह कौशल विकास कार्यक्रम उनके जीवन स्तर को सुधारने और उन्हें वित्तीय रूप से स्वतंत्र बनाने में बेहद कारगर साबित हो रहा है।
राज्य में इस समय 934 आईटीआई संचालित हो रही हैं, जिनमें 290 सरकारी नियंत्रण में और 644 निजी प्रबंधन के तहत काम कर रही हैं। इन केंद्रों में औद्योगिक जगत की मांग को ध्यान में रखते हुए युवाओं को हुनरमंद बनाया जा रहा है। वर्ष 2025 के शैक्षणिक सत्र में सरकारी आईटीआई में कुल 94.55 फीसदी एडमिशन दर्ज किए गए, जो कि अब तक के इतिहास में सबसे अधिक हैं। महिला सशक्तिकरण को बल देने के लिए इन सरकारी संस्थानों में 35 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित की गई हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखाई दे रहे हैं।
वर्तमान में प्रदेश की इन आईटीआई में उपलब्ध 71 अत्याधुनिक विधाओं (ट्रेड्स) में 15 हजार से ज्यादा महिला प्रशिक्षणार्थी अपनी ट्रेनिंग पूरी कर रही हैं। विशेषकर “कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (कोपा)”, “स्टेनोग्राफर हिन्दी” और “इलेक्ट्रिशियन” जैसे ट्रेड्स में बेटियों की भागीदारी बड़े पैमाने पर देखने को मिल रही है। यह रुझान राज्य के बदलते परिवेश और महिलाओं के बढ़ते हौसलों की तस्दीक करता है, जो नए क्षेत्रों को चुनकर अपना भविष्य संवार रही हैं।
लड़कियों को पढ़ाई के दौरान सुरक्षित और अनुकूल माहौल देने के लिए राज्य में 7 समर्पित शासकीय महिला आईटीआई कार्यरत हैं। इसके साथ ही 56 सरकारी आईटीआई में छात्राओं के लिए हॉस्टल की सुविधा दी गई है, जिनमें कुल क्षमता 3400 से अधिक सीटों की है। इस व्यवस्था के कारण सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों के लिए भी तकनीकी शिक्षा हासिल करना बेहद सुगम हो गया है।
विभाग का मुख्य ध्येय केवल प्रशिक्षण देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनका मुख्य ध्यान महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आजीविका से जोड़ने पर भी है। इसी रणनीति के तहत आयोजित स्पेशल महिला प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से 777 महिला अभ्यर्थियों को विभिन्न संस्थानों में रोजगार मिला है। इसके अतिरिक्त, इंदौर स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की मदद से 509 महिलाओं को निशुल्क वाहन चलाने की ट्रेनिंग दी गई, जिससे उनके स्वावलंबन को नई मजबूती मिली है।
आर्थिक दिक्कतों के कारण किसी भी बेटी की पढ़ाई न छूटे, इसके लिए सरकार द्वारा विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांगजन और निर्धन परिवारों से ताल्लुक रखने वाली 13 हजार से अधिक छात्राओं को वर्तमान में स्कॉलरशिप दी जा रही है, जो उनके प्रशिक्षण को जारी रखने में मददगार साबित हो रही है।
रोजगारन्मुखी पहलों में ‘मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना’ भी महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत हजारों युवतियों को विभिन्न उद्योगों में व्यावहारिक (ऑन-द-जॉब) ट्रेनिंग दी गई है। इस कार्यक्रम को पूरा करने वाले कुल अभ्यर्थियों में 5660 बेटियां शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर, सागर की सुश्री स्नेहा रजक और रायसेन की सुश्री लिया जैसी लड़कियों ने इस योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर नौकरी हासिल की है और अब वे अपने घर की वित्तीय रीढ़ बन रही हैं।
आधुनिक वैश्विक जरूरतों के मुताबिक महिलाओं को कुशल बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से विशेष ट्रेनिंग मॉड्यूल चलाए जा रहे हैं। इसके तहत “जीवन तरंग” योजना द्वारा हर साल करीब 3000 लड़कियों को हुनर सिखाया जा रहा है। वहीं, “यूएन वीमेन” के साझा प्रयासों से बेटियों को “स्टेम (STEM) और सॉफ्ट स्किल्स” की शिक्षा दी जा रही है, जिससे वे एडवांस टेक्नोलॉजी और आधुनिक कार्यक्षेत्रों के लिए खुद को तैयार कर पा रही हैं।
इसके अलावा, परम फाउंडेशन के तत्वावधान में चलने वाले आईटीआई कौशल कॉलेजों में भी बेटियां बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। धार जिले के सरदारपुर आईटीआई में संचालित कोर्सेज में हिस्सा लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं का शत-प्रतिशत प्लेसमेंट रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। इसके साथ ही, ‘प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना’ का लाभ उठाते हुए भी 64 हजार से ज्यादा महिलाओं ने अलग-अलग विधाओं में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं और अकादमिक मंचों पर भी प्रदेश की बेटियों ने अपनी मेधा का प्रदर्शन किया है। शासकीय महिला आईटीआई बैतूल की छात्रा सुश्री त्रिशा तावड़े ने राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद की परीक्षा के सेंट्रल ज़ोन में टॉप किया। इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पुरस्कृत किया गया। गौरतलब है कि देश भर के कुल 10 ट्रेड टॉपर्स में से 5 अकेले मध्यप्रदेश की बेटियां थीं।
इसी तरह, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2024 के गरिमामयी मंच पर भोपाल स्थित शासकीय संभागीय आईटीआई की प्रशिक्षण अधिकारी श्रीमती प्रेमलता रहांगडाले को देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु ने सम्मानित किया। इसके अलावा, इंडिया स्किल प्रतियोगिता-2024 में भी राज्य की बेटियों ने रजत और कांस्य पदकों के साथ ‘मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस’ पर कब्जा जमाया। ये सभी उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के समन्वय से प्रदेश की नारी शक्ति अब पूरे सम्मान और आत्मविश्वास के साथ देश के विकास में अपना योगदान दे रही है।



