परमाणु हथियारों से लैस ईरान पूरे क्षेत्र को धकेल देगा भीषण युद्ध में, अमेरिकी नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टोल टैक्स कतई मंजूर नहीं: मार्को रुबियो

वाशिंगटन में अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा नीतिगत बयान जारी किया है, जिसमें तेहरान को परमाणु महत्वाकांक्षाएं छोड़ने की सख्त हिदायत दी गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की ओर से आए इन बयानों में जहां एक तरफ सैन्य कार्रवाई के संकेत हैं, वहीं दूसरी तरफ कूटनीति से विवाद सुलझाने की बात भी कही गई है। यह अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया ऐसे दौर में आई है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत बेहद संवेदनशील मोड़ पर है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। नई दिल्ली की यात्रा पर निकलने से ठीक पहले मियामी के होमस्टेड हवाई अड्डे पर पत्रकारों से मुखातिब होते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोटूक कहा कि ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर कोई भी शुल्क या लेवी लगाने की कोशिश को पूरी तरह खारिज कर दिया जाएगा।
वैश्विक जलमार्गों की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्ट्रेट में किसी भी तरह की टोल प्रणाली को मान्यता नहीं देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर बहरीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लाए गए एक विशेष निंदा प्रस्ताव को अमेरिका का पूरा सहयोग प्राप्त है। रुबियो के मुताबिक, इस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद के इतिहास में रिकॉर्ड तोड़ सफलता मिली है और दुनिया के 100 से अधिक देशों ने इस पर अपने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने आगाह किया कि कोई भी जिम्मेदार देश ईरान की इस मनमानी के पक्ष में नहीं है और यदि तेहरान ने इस दिशा में कदम बढ़ाए, तो भविष्य में होने वाले तमाम कूटनीतिक समझौतों के रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे।
दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से देश को आश्वस्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की अभेद्य मौजूदगी के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर वाशिंगटन का ‘पूर्ण वर्चस्व’ कायम है। इस सुरक्षा घेरे को ‘लोहे की दीवार’ करार देते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन की हरी झंडी के बिना वहां से किसी भी जलपोत का गुजरना नामुमकिन है। ट्रंप ने यह दावा भी किया कि पूर्व की कार्रवाइयों में ईरान की सैन्य ताकत को गंभीर रूप से पंगु बनाया जा चुका है, जिसमें उसकी वायुसेना, नौसेना और मिसाइल तंत्र का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह निष्क्रिय किया जा चुका है।
परमाणु सुरक्षा को अपनी प्रशासनिक प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान के पास परमाणु हथियारों की मौजूदगी का सीधा मतलब मध्य पूर्व में विनाशकारी युद्ध की शुरुआत होगा, जिसका सीधा असर अमेरिकी और यूरोपीय महाद्वीप की सुरक्षा पर पड़ेगा। ट्रंप ने कहा कि हालांकि अमेरिका अभी बातचीत के जरिए समाधान तलाश रहा है, लेकिन यदि स्थितियां नहीं सुधरीं तो सैन्य हस्तक्षेप का विकल्प खुला हुआ है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि या तो ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखना सुनिश्चित किया जाएगा, या फिर अमेरिका को अत्यंत कठोर कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। कूटनीतिक प्रयासों पर बोलते हुए रुबियो ने भी जोड़ा कि राष्ट्रपति हमेशा बातचीत को प्राथमिकता देते हैं, भले ही मौजूदा वार्ताओं के नतीजों को लेकर अभी निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
इस रणनीतिक विमर्श के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत के हितों की रक्षा को लेकर भी बड़ा बयान दिया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संकट के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर आने वाले संभावित खतरों को स्वीकार करते हुए रुबियो ने भरोसा दिलाया कि अमेरिका, भारत की तेल और ऊर्जा संबंधी सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है। भारत को अमेरिका का एक ‘असाधारण और अत्यंत महत्वपूर्ण साझेदार’ बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश वैश्विक मंच पर विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि उनकी आगामी भारत यात्रा के दौरान मुख्य एजेंडा द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और क्वाड (Quad) गठबंधन की बैठकों में रणनीतिक समन्वय को मजबूत करना है।



