जिनेवा में बोले स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में भारत ने दर्ज की ऐतिहासिक प्रगति, वैश्विक सहयोग की पेशकश

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बुधवार को जिनेवा में आयोजित 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा से इतर एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने ‘मातृ, नवजात एवं बाल स्वास्थ्य साझेदारी’ (पीएमएनसीएच) की बोर्ड अध्यक्ष हेलेन क्लार्क के साथ मुलाकात कर महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य से जुड़े वैश्विक एजेंडे को मजबूती से आगे बढ़ाने की भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न रणनीतिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
केंद्रीय मंत्री नड्डा ने बैठक में पीएमएनसीएच के साथ भारत के दो दशक पुराने जुड़ाव को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2005 में संगठन की स्थापना के समय से ही इसके साथ सक्रियता से जुड़ा हुआ है और इसके लक्ष्यों को पूरा करने में योगदान दे रहा है। नड्डा ने संगठन के भीतर बोर्ड के उपाध्यक्ष और स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि भारत की ओर से दिया जाने वाला 20 लाख अमेरिकी डॉलर का वार्षिक वित्तीय अनुदान वर्तमान में प्रक्रियाधीन है, जिसके संदर्भ में जल्द ही आधिकारिक विवरण साझा किया जाएगा।
भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य मॉडल की सराहना करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने देश के नवाचारों और समावेशी नीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने महिलाओं, बच्चों और किशोरों की सेहत को हमेशा अपनी स्वास्थ्य सेवाओं और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के केंद्र बिंदु में रखा है। इस दिशा में ऐतिहासिक कदमों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि भारत साल 2014 में ही किशोरों के कल्याण के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया था। इसके तहत स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्तर पर विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने देश में मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में आई भारी गिरावट का आंकड़ा भी सामने रखा। उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर हो रहे सुधारों की तुलना में भारत ने इन दोनों सूचकांकों को बहुत तेजी से नीचे लाने में सफलता पाई है। नड्डा के अनुसार, भारत का यह साक्ष्य-आधारित जन स्वास्थ्य मॉडल दुनिया के अन्य देशों के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने अन्य देशों को इस क्षेत्र में हर संभव तकनीकी मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराने की भारत की इच्छा प्रकट की।
डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में भारत की प्रगति को वैश्विक मंच पर साझा करने की इच्छा जताते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि देश ने कई बेहतरीन डिजिटल जन स्वास्थ्य उत्पाद और तकनीकी संसाधन तैयार किए हैं। वैश्विक भलाई के लिए इन नवाचारों का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने पीएमएनसीएच को आमंत्रित किया कि वे भारत के इन सफल मॉडलों को भौतिक और डिजिटल माध्यमों से दुनिया के सामने प्रदर्शित करें।
बैठक के समापन पर भारतीय दर्शन की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) के विचार को सामने रखा। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना केवल एकजुटता, करुणा और परस्पर सहयोग से ही किया जा सकता है। भारत की इन उपलब्धियों और नेतृत्व की सराहना करते हुए हेलेन क्लार्क ने वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में भारत की महत्वपूर्ण भागीदारी को स्वीकार किया।


