मध्य प्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने की कवायद तेज, दूध उत्पादकों को मिला रिकॉर्ड ₹1609 करोड़ का भुगतान

भोपाल में आयोजित पशुपालन विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि मध्य प्रदेश को देश का अग्रणी दुग्ध उत्पादक राज्य बनाने के समन्वित प्रयास अब धरातल पर दिखने लगे हैं। राज्य ने प्रतिदिन औसतन 9.67 लाख किलोग्राम दुग्ध संकलन का नया रिकॉर्ड बनाया है, जो पिछले साल की तुलना में 11 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। मंत्रालय में संपन्न हुई इस बैठक में पशुपालन और डेयरी विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, मुख्य सचिव अनुराग जैन और प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव सहित शासन के तमाम आला अधिकारी उपस्थित थे।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष आंकड़ों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले छह महीनों के दौरान रोजाना का औसत दूध संकलन बढ़कर 11 लाख किलोग्राम से अधिक हो गया है। दुग्ध सहकारी संघों ने इस बार किसानों को पिछले वर्ष के मुकाबले 15 प्रतिशत से भी ज्यादा राशि का भुगतान किया है। बैठक के दौरान डॉ. यादव ने राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही पशुपालन और डेयरी क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनू योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम, क्षीरधारा ग्राम योजना, ब्रीडर एसोसिएशन, राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ की गतिविधियों और दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान की अद्यतन स्थिति का जायजा लिया। साथ ही पशुओं के इलाज, चारे की उपलब्धता, आत्मनिर्भर गौशालाओं के संचालन और गोरस ऐप के क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश अभी देश के शीर्ष तीन दुग्ध उत्पादक राज्यों में शामिल है, लेकिन सरकार का संकल्प इसे नंबर वन बनाने का है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए राज्य में 1752 नई दुग्ध सहकारी समितियां गठित की जा चुकी हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करते हुए जहां ग्वालियर डेयरी प्लांट को आधुनिक रूप दिया गया है, वहीं शिवपुरी के बंद पड़े डेयरी प्लांट को पुनर्जीवित किया गया है। इसके अलावा इंदौर में प्रतिदिन 3 लाख लीटर की बड़ी क्षमता वाले मिल्क पाउडर प्लांट का संचालन शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री ने इन प्रयासों को लगातार जारी रखने के निर्देश दिए हैं ताकि विक्रय नेटवर्क और सुदृढ़ हो सके।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के तकनीकी मार्गदर्शन के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। वर्ष 2024-25 में दुग्ध उत्पादक किसानों को 1398 करोड़ रुपये दिए गए थे, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1609 करोड़ रुपये हो गए। यह पिछले साल की तुलना में पूरे 15 फीसदी की बढ़ोतरी है। पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान प्रणाली के कारण दुग्ध संघों ने दूध के खरीद मूल्य में 2.50 रुपये से लेकर 8.50 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन स्तर में सुधार आ रहा है।
बाजार में स्थानीय ब्रांड ‘सांची’ की साख और पकड़ पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। बैठक में यह जानकारी साझा की गई कि बेहतर पैकेजिंग और रणनीतिक मार्केटिंग की बदौलत सांची के दुग्ध उत्पादों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ है। मुख्य रूप से मूल्य संवर्धित उत्पादों की श्रेणी में घी की बिक्री में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही बाजार में सांची के दही, पनीर, छाछ और फ्लेवर्ड मिल्क की मांग में भी लगातार वृद्धि हो रही है।



