ईंधन की कीमतों में लगातार तीसरी वृद्धि: दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपये और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर हुआ

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उछाल के बीच घरेलू तेल कंपनियों ने शनिवार को देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की। सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा की गई इस नई वृद्धि के तहत पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले महज 10 दिनों के भीतर आम जनता को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तकरीबन 5 रुपये प्रति लीटर की कुल बढ़ी हुई दर का सामना करना पड़ा है।

शनिवार सुबह से प्रभावी हुई इस मूल्य वृद्धि के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में ईंधन के दाम नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल के लिए उपभोक्ताओं को 99.51 रुपये और डीजल के लिए 92.49 रुपये चुकाने होंगे। वहीं, वित्तीय राजधानी मुंबई में पेट्रोल की दर 108.49 रुपये प्रति लीटर और डीजल की दर 95.02 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। कोलकाता में पेट्रोल का भाव बढ़कर 110.64 रुपये और डीजल का 97.02 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 105.31 रुपये और डीजल 96.98 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जा रहा है।

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जारी उथल-पुथल के बीच देश में ईंधन की कीमतों में पिछले 10 दिनों के भीतर यह तीसरा संशोधन है। पश्चिम एशिया के देशों में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की लागत काफी बढ़ गई है। इसी बढ़ी हुई लागत के वित्तीय बोझ को देश के आम उपभोक्ताओं पर क्रमिक रूप से स्थानांतरित करने की प्रक्रिया सरकारी तेल कंपनियों द्वारा गत 15 मई से शुरू की गई थी।

इस चालू महीने में कीमतों के बढ़ने का क्रम 15 मई से आरंभ हुआ था, जब तेल कंपनियों ने सीधे 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू की थी। इसके बाद 19 मई को पुनः कीमतों में 80 पैसे प्रति लीटर से अधिक की वृद्धि की गई। उस दूसरी बढ़ोतरी के लागू होने पर दिल्ली में पेट्रोल का मूल्य 98.64 रुपये और डीजल का मूल्य 91.58 रुपये प्रति लीटर निर्धारित हुआ था, जो शनिवार को हुई ताजा वृद्धि के बाद अब अपने नए स्तर पर पहुंच चुका है।

पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी को लेकर देश के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने तेल कंपनियों के इस निर्णय का बचाव किया है। पार्टी के विभिन्न पदाधिकारियों ने दुनिया के अन्य देशों में ईंधन की बढ़ती कीमतों के आंकड़े पेश करते हुए भारत की स्थिति की तुलना की। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर छाई इस गंभीर आर्थिक चुनौती के बावजूद, दुनिया की प्रमुख बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत ने अपने नागरिकों पर इस संकट का सबसे कम भार पड़ने दिया है।

इस विषय पर अपनी बात रखते हुए भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए वैश्विक तेल बाजार की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण किया। उन्होंने लिखा कि पश्चिम एशिया के युद्धग्रस्त हालातों के कारण वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी तेजी आई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ब्लॉक होने और कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने के चलते अप्रैल और मई के अधिकांश समय में ब्रेंट क्रूड की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बनी रहीं। मालवीय ने कहा कि इस आपूर्ति संकट का सीधा प्रभाव दुनिया की लगभग हर अर्थव्यवस्था के रिटेल आउटलेट्स पर साफ देखने को मिला, लेकिन इन सबके बीच भारत एक विशिष्ट अपवाद बनकर उभरा है, जिसने वैश्विक दबाव के बाद भी घरेलू कीमतों को काफी हद तक संतुलित रखा है।

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