राशन वितरण व्यवस्था को हाई-टेक बनाएगी सरकार, ‘सार्थक-पीडीएस’ योजना को अगले पांच वर्षों के लिए मिली कैबिनेट की हरी झंडी

केंद्र सरकार ने देश के हर जरूरतमंद हिस्से तक खाद्यान्न की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली में व्यापक सुधारों का खाका खींचा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में ‘सार्थक-पीडीएस’ योजना को आगामी पांच वर्षों तक विस्तार देने की मंजूरी दे दी गई है। इस संबंध में प्रधानमंत्री ने डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से जानकारी देते हुए कहा कि सरकार देश के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक खाद्य सुरक्षा पहुंचाने के अपने वादे पर कायम है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में जोर देकर कहा कि इस नई पहल से पीडीएस से जुड़ी लॉजिस्टिक्स, परिवहन और खाद्यान्न वितरण की पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता का एक नया युग शुरू होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘सार्थक-पीडीएस’ को आधुनिक रूप में जारी रखने के फैसले से न सिर्फ राशन आपूर्ति सुगम होगी, बल्कि उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक प्रभावी व्यवस्था भी तैयार होगी।

वित्तीय मोर्चे पर इस बड़ी योजना के क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार की ओर से 25,530 करोड़ रुपये की अनुमानित राशि खर्च की जाएगी। यह फंड 16वें वित्त आयोग की अवधि के दौरान केंद्रीय हिस्से के रूप में जारी किया जाएगा। योजना को 31 मार्च 2031 तक के लिए प्रभावी बनाया गया है, जिसका मुख्य लक्ष्य वितरण प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों को समाप्त करना और पूरे तंत्र को पूरी तरह से पारदर्शी व जवाबदेह बनाना है।

इस नई व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए दो मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं का विलय किया गया है। अब ‘स्मार्ट पीडीएस’ और ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राज्यों के आंतरिक खाद्यान्न परिवहन एवं राशन दुकान डीलरों के मार्जिन हेतु दी जाने वाली सहायता’ को मिलाकर ‘सार्थक-पीडीएस’ का रूप दे दिया गया है। इन दोनों योजनाओं के एकीकरण से पूरी व्यवस्था का संचालन अधिक सुसंगत तरीके से हो सकेगा।

तकनीकी मोर्चे पर इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जहां राशन वितरण पर नजर रखने के लिए ब्लॉकचेन, मशीन लर्निंग (एमएल), एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (एनएलपी) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके माध्यम से रियल-टाइम डेटा की निगरानी होगी, राज्य स्तर पर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे और आईएसओ मानकों के अनुरूप सुरक्षित एवं टिकाऊ डेटाबेस तैयार किया जाएगा।

इस डिजिटल और आधुनिक बदलाव का सीधा फायदा देश के 81.35 करोड़ एनएफएसए लाभार्थियों को मिलेगा। सरकार के अनुसार, देशवासियों को सम्मानजनक जीवन के साथ खाद्य सुरक्षा देना उसकी वैधानिक प्रतिबद्धता है। पिछले दस वर्षों में पीडीएस के डिजिटलीकरण की दिशा में एंड-टू-एंड कंप्यूटरीकरण और ‘अन्न सहायता’ जैसे मोबाइल ऐप के जरिए कई प्रयास हुए हैं, जिसमें 1 अप्रैल 2023 से लागू स्मार्ट पीडीएस के तहत सभी 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में ई-पीओएस मशीनें, ऑनलाइन आवंटन और आधार सीडिंग जैसे कार्य पहले ही पूरे किए जा चुके हैं।

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