बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समयबद्धता और जनहित पर प्रधानमंत्री का जोर; प्रगति बैठक में 30,000 करोड़ के कार्यों की समीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित प्रगति संवाद के 51वें सत्र की अध्यक्षता करते हुए देश के नौ राज्यों में चल रही 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन का जायजा लिया। प्रधानमंत्री ने गुरुवार को सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से इस बैठक की जानकारी दी। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य रूप से देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली रेल, सड़क और विद्युत क्षेत्र की परियोजनाओं में आ रही बाधाओं को दूर करने तथा विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री ने बैठक को संबोधित करते हुए अधिकारियों और राज्य सरकारों को सचेत किया कि विकास कार्यों में देरी के कारण परियोजना की लागत अनावश्यक रूप से बढ़ जाती है और जनता भी समय पर लाभ पाने से वंचित रह जाती है। उन्होंने सभी प्रशासनिक निकायों को कार्यशैली में तत्परता लाते हुए निर्धारित अवधि में लक्ष्यों को हासिल करने की हिदायत दी।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 और केन-बेतवा लिंक परियोजना की प्रगति को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन विकास कार्यों की सफलता इस बात से मापी जानी चाहिए कि इनसे नागरिकों के जीवन में कितना व्यावहारिक सुधार आया है। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट्स और गोबरधन योजना के तहत ढांचागत विकास को प्राथमिकता के आधार पर तेज किया जाए।

पावर सेक्टर पर बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने शहरों में छतों पर लगने वाले सोलर सिस्टम (रूफटॉप सोलर) को एक जन-आंदोलन के रूप में लागू करने का आह्वान किया। उनके अनुसार, रिहायशी इलाकों, सार्वजनिक प्रतिष्ठानों और शहरों में सौर ऊर्जा के विस्तार से देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा, पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलेगा और बिजली पर होने वाला खर्च भी कम होगा।

परिवहन संपर्क के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने वधावन बंदरगाह को एक अत्याधुनिक मल्टी-मॉडल विकास के मानक के रूप में स्थापित करने की बात कही, जो परिवहन के चारों माध्यमों—सड़क, रेल, वायु और जलमार्ग से सुगम रूप से जुड़ा हो। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को अंतर-राज्यीय सहयोग का एक उत्कृष्ट मॉडल बताते हुए उन्होंने कहा कि यह जल प्रबंधन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इसके माध्यम से उन्होंने जल संरक्षण, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और भूजल स्तर को सुधारने पर विशेष ध्यान देने को कहा।

प्रशासनिक सुधारों की जानकारी देते हुए कैबिनेट सचिव ने बैठक की शुरुआत में बताया कि सामाजिक क्षेत्र की कल्याणकारी योजनाओं की देखरेख के लिए एक नया नियमित तंत्र क्रियान्वित किया गया है, जिससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।

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