कच्छ सीमा पर बुनियादी ढांचा हुआ मजबूत; गृह मंत्री अमित शाह ने किया दो नई सीमा चौकियों का अनावरण

गुजरात के सीमावर्ती जिले भुज में शुक्रवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर स्थित G-7 सीमा चौकी पर जाकर तैनात सुरक्षाकर्मियों की हौसलाअफजाई की। इस दौरे के दौरान उन्होंने राष्ट्र को समर्पित करते हुए G-7 और G-13 बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) का विधिवत लोकार्पण किया। इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी, केंद्रीय गृह सचिव, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के निदेशक, सीमा प्रबंधन सचिव और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक समेत कई आला अधिकारी उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान अपने संबोधन में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमारे बीएसएफ के जवान बेहद विषम और विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के बीच देश की सरहदों की मुस्तैदी से निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर चुनौती को हंसते हुए झेलने वाले इन जवानों को देखकर ऐसा लगता है कि उनकी कठिन ड्यूटी के सामने हमारा काम बहुत आसान है। शाह ने बल देते हुए कहा कि जब सीमा पर तैनात प्रहरी बिना थके चौबीसों घंटे देश की सेवा कर सकते हैं, तो देश के किसी भी अन्य नागरिक को थकने का अधिकार नहीं है।
गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 1965 में अपनी स्थापना के बाद से पिछले 60 सालों के दौरान बीएसएफ ने देश की दो सबसे कठिन सीमाओं की रक्षा करने का गौरव हासिल किया है। प्रहरियों को माइनस 45 डिग्री की जमा देने वाली ठंड से लेकर प्लस 45 डिग्री से ज्यादा की झुलसाने वाली गर्मी में भी मोर्चे पर डटना पड़ता है। चाहे कच्छ का रण हो, सर क्रीक और हरामी नाले के दलदली रास्ते हों, राजस्थान के मरुस्थलीय टीले हों, कश्मीर के बर्फीले पहाड़ हों या फिर सुंदरबन के दलदली जंगल—बीएसएफ हर मोर्चे पर देश की रक्षा की पहली दीवार बनकर खड़ी रही है।
अमित शाह ने पिछले छह दशकों में देश की बलिवेदी पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले बीएसएफ के 2000 से अधिक वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन जवानों के अप्रतिम शौर्य के कारण ही देश के 140 करोड़ लोग चैन की नींद सोते हैं और सुरक्षित महसूस करते हैं। जवानों के इसी शौर्य और कठिन जीवन से आम जनता को परिचित कराने के लिए बनासकांठा में बनाए गए विशेष केंद्र का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि बीते एक माह में करीब 2.5 लाख लोग वहां आ चुके हैं। वहां आए संदेशों में अनेक माताओं ने अपने बच्चों को बीएसएफ में शामिल कराने की इच्छा व्यक्त की है।
अमित शाह ने पूर्ववर्ती सुरक्षा हालातों की चर्चा करते हुए कहा कि जब उन्होंने गृह मंत्रालय का दायित्व संभाला था, तब रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हरामी नाला और सर क्रीक क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से काफी कमजोर माने जाते थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस पूरे बेल्ट में नए वॉच टावर, सड़कों का संजाल, पेयजल, आवासीय कॉलोनियां, चिकित्सा सुविधाएं और आधुनिक फेंसिंग लगाने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया। उन्होंने भरोसा जताया कि अगले दो वर्षों के भीतर यह पूरा इलाका घुसपैठियों के लिए पूरी तरह अभेद्य किला बन जाएगा।
जवानों के कल्याण और अत्याधुनिक संसाधनों पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार बजट की उपलब्धता की फिक्र किए बिना सरहदों पर आधुनिक तकनीक का विस्तार कर रही है। सीमा चौकियों को जमीनी स्तर से ऊपर उठाया गया है और ऊंचे निगरानी टावर लगाए गए हैं। उन्होंने घोषणा की कि बीएसएफ के 60वें वर्ष में प्रवेश के साथ ही सीमा प्रबंधन की नीति में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अब केवल ‘बॉर्डर सुरक्षा’ की जगह ‘टेरिटोरियल सुरक्षा’ (क्षेत्रीय सुरक्षा) के व्यापक मॉडल पर काम होगा, जिसमें देश की जनता, नागरिक प्रशासन, स्थानीय पुलिस बल, भारतीय सेना और बीएसएफ एकजुट होकर एक ‘चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड’ के रूप में काम करेंगे।
स्मार्ट बॉर्डर सिक्युरिटी प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि इसके तहत हजारों करोड़ रुपए खर्च करके ड्रोन, रडार और अत्याधुनिक सेंसरों का जाल बिछाया जा रहा है, ताकि कोई भी भारत की सीमा में अवैध प्रवेश की जुर्रत न कर सके। पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां सीमा पर बाड़ का काम अधूरा होना सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती था, लेकिन राज्य में उनकी पार्टी की सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री ने एक हफ्ते के भीतर ही फेंसिंग के लिए जमीन देने का सैद्धांतिक फैसला लेते हुए कुछ भूमि सौंप भी दी है। बाड़ का काम पूरा होते ही वहां घुसपैठ पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
उन्होंने अंत में कहा कि दुर्गम नदी-नालों और जंगलों के रास्तों से होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए तकनीकी फेंसिंग का कार्य तेज गति से चल रहा है। आने वाले समय में बीएसएफ के पराक्रम और निष्ठा से सीमाएं और मजबूत होंगी। केंद्रीय मंत्री ने सीमावर्ती गुजरात के इलाकों में शांति बनाए रखने के लिए प्रहरियों की भूमिका की सराहना की और देश की ओर से उनके जज्बे को सलाम किया।



