हिमाचल के कसौली में वन्य क्षेत्र की आग को वायुसेना ने बुझाया, पहली बार हुआ नाइट विजन बम्बी बकेट का इस्तेमाल

भारतीय वायुसेना ने हिमाचल प्रदेश के कसौली के जंगलों में लगी भीषण आग को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक हवाई अभियान चलाया। वायुसेना ने 26 मई को अभियान की शुरुआत की थी, जिसमें एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया गया। प्रभावित वन्य क्षेत्र में 93,000 लीटर से अधिक पानी का छिड़काव करके आग के विस्तार को रोका गया, जिससे वन्य संपदा को बड़े विनाश से बचाया जा सका।

यह पूरा घटनाक्रम 26 मई को तब शुरू हुआ जब कसौली के नजदीकी जंगलों से आग की लपटें उठने की खबर मिली। प्रारंभिक मूल्यांकन के लिए वायुसेना ने तत्काल प्रभाव से एक चीता हेलीकॉप्टर मौके पर भेजा। जमीनी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन की सहायता हेतु तुरंत एमआई-17 वी5 मीडियम लिफ्ट हेलीकॉप्टर ऑपरेशन में शामिल किए गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सोलन जिले के कसौली बीट में भड़की इस आग ने तकरीबन 10 हेक्टेयर के विशाल वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया। जंगलों से उठती लपटें तेजी से आवासीय बस्तियों, प्रमुख नागरिक ढांचों और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की तरफ बढ़ रही थीं, जिससे वहां बड़ा खतरा पैदा हो गया था।

खतरे को टालने के लिए वायुसेना ने राज्य प्रशासन, वन विभाग और थल सेना के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर संयुक्त ‘बम्बी बकेट’ ऑपरेशन शुरू किया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान हेलीकॉप्टरों द्वारा चंडीगढ़ की सुखना झील से पानी का संग्रहण किया गया। प्रत्येक फेरे में हेलीकॉप्टर करीब 2,000 से 2,500 लीटर पानी भरकर लाते रहे और प्रभावित इलाकों में डालते रहे।

इस रेस्क्यू ऑपरेशन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि वायुसेना ने अपने इतिहास में पहली बार रात के समय अग्निशमन के लिए ‘नाइट विजन गॉगल्स’ (एनवीजी) तकनीक का इस्तेमाल किया। अंधेरे और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के चलते बेहद सीमित दृश्यता के बीच इस तरह के साहसिक अभियान को पूरा करना तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन माना जाता है।

रात के समय पहाड़ों में उड़ान भरने के खतरों के बाद भी वायुसेना के जांबाज क्रू ने असाधारण व्यावसायिक क्षमता और एकाग्रता का प्रदर्शन किया। पायलटों ने पूरी कार्यकुशलता के साथ आग पर निशाना साधा और मिशन को पूरा किया। इस सफल कार्रवाई ने संकट के समय नागरिक प्रशासन को सहयोग देने की वायुसेना की स्थापित क्षमताओं को पुनः रेखांकित किया है।

इस पूरे मिशन में जहां पायलट आसमान में मोर्चा संभाले हुए थे, वहीं जमीन पर तैनात वायुसेना के तकनीकी और ग्राउंड क्रू ने भी प्रतिकूल परिस्थितियों में निरंतर कार्य किया। उन्होंने बिना रुके हेलीकॉप्टरों के रखरखाव, तकनीकी जांच और तत्पर तैनाती को सुनिश्चित किया, जिससे यह अभियान बिना किसी रुकावट के लगातार चलता रहा। विभिन्न विभागों के इसी सामूहिक और समयबद्ध प्रयास से एक बहुत बड़ी आपदा को समय रहते टाल दिया गया।

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