स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट की ओर बढ़ते कदम: गृह मंत्री अमित शाह ९ जून को सौंपेंगे एलपीएमएस की सौगात

भारत सरकार के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आगामी मंगलवार (9 जून, 2026) को देश की राजधानी नई दिल्ली में ‘लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ (LPMS) राष्ट्र को समर्पित करेंगे। सीमा पार से होने वाले वाणिज्यिक लेन-देन और मुसाफिरों की आवाजाही को हाई-टेक, सुरक्षित और बाधारहित बनाने की दिशा में यह केंद्र सरकार का एक बड़ा नीतिगत कदम है। इसी कार्यक्रम में गृह मंत्री द्वारा डॉकी और श्रीमंतपुर लैंड पोर्ट्स पर तैयार किए गए नए आवासीय परिसरों का भी अनावरण किया जाएगा।

सीमाओं की सुरक्षा और वहां से होने वाले व्यापार को सुव्यवस्थित करने के लिए एलपीएमएस को एक मील का पत्थर माना जा रहा है। प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह डिजिटल पहल देश की सीमाओं को ‘स्मार्ट’ बनाने के साथ-साथ ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन को गति देने का काम करेगी। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को भी एक नया तकनीकी कवच मिलेगा।

तकनीकी रूप से यह प्रणाली एक ऐसे एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगी, जिसके दायरे में देश के सभी भूमि बंदरगाह आएंगे। यह प्लेटफॉर्म अलग-अलग चौकियों के बीच लॉजिस्टिक्स और नियामकीय डाटा को सुरक्षित ढंग से साझा करने की सुविधा देगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब जमीनी सीमाओं पर भी यात्रियों और कारोबारियों को वही विश्वस्तरीय डिजिटल अनुभव मिलेगा, जो वर्तमान में बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स या समुद्री पोर्ट्स पर उपलब्ध है।

इस समूची प्रणाली को पूरी तरह निष्पक्ष (न्यूट्रल) और ओपन सोर्स मॉडल पर विकसित किया गया है। इसका सीधा लाभ यह होगा कि सीमा पर तैनात कस्टम, आव्रजन (इमिग्रेशन) और सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ वहां काम करने वाले निजी हितधारकों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बिना किसी रुकावट के हो सकेगा। आपसी समन्वय बेहतर होने से माल ढुलाई में लगने वाले समय और प्रशासनिक जटिलताओं में भारी कमी आएगी।

इस नई व्यवस्था के तहत स्लॉट की बुकिंग से लेकर शुल्क भुगतान, माल की ट्रैकिंग और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस तक की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो में बदल दिया गया है। देश के सीमा प्रबंधन को अधिक चुस्त-दुरुस्त और इंटरऑपरेबल बनाने के लिए इस नए सिस्टम को राष्ट्रीय स्तर के अन्य बड़े डिजिटल नेटवर्क जैसे आइसगेट, यूएलआईपी और मोटर वाहन इकोसिस्टम से भी सीधे जोड़ा गया है।

उल्लेखनीय है कि देश की सीमाओं पर इन ढांचागत सुविधाओं को तैयार करने की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले वैधानिक निकाय ‘भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण’ (LPAI) की है। एलपीएआई वर्तमान में भारत की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर कुल 15 लैंड पोर्ट्स का प्रबंधन देख रहा है। इनमें अटारी, डेरा बाबा नानक, रुपइडिहा, रक्सौल, जोगबनी, दर्रांग, पेट्रापोल, डॉकी, सुतारकंडी, गोलकगंज, मनकाचर, अगरतला, श्रीमंतपुर, सबरूम और मोरेह जैसी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमा चौकियां शामिल हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2014-15 के बाद से देश के जमीनी व्यापार मार्ग तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। एक दशक पहले जहां इन पोर्ट्स के जरिए महज 5,000 करोड़ रुपए का आयात-निर्यात व्यापार होता था, वह वित्तीय वर्ष 2024-25 में बढ़कर 82,800 करोड़ रुपए और इसके बाद वर्ष 2025-26 में 73,300 करोड़ रुपए रहा। वाणिज्यिक वाहनों की आवाजाही में भी ऐसा ही उछाल देखा गया, जो 1.1 लाख से बढ़कर साल 2024-25 में 6.69 लाख और साल 2025-26 में 6.63 लाख दर्ज की गई।

व्यापार के साथ-साथ इन रास्तों से यात्रा करने वाले लोगों के आंकड़ों में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पड़ोसी देशों की भू-राजनीतिक संवेदनशीलता के बावजूद लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2014-15 में जहां इन भूमि बंदरगाहों से केवल 1.7 लाख यात्रियों ने सफर किया था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 25.8 लाख हो गई। इसके बाद, साल 2025-26 के दौरान भी इन रास्तों से लगभग 11.90 लाख लोगों का आवागमन दर्ज किया गया।

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