मध्य प्रदेश कैबिनेट की बड़ी सौगात: इंफ्रास्ट्रक्चर, मेट्रो और किसान कल्याण के लिए ₹13,800 करोड़ के प्रस्तावों को मिली मंजूरी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में राज्य के विकास को नई रफ्तार देने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट ने मध्य प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए करीब 13,800 करोड़ रुपये के वित्तीय बजट को हरी झंडी दिखाई है। इस बड़े निवेश के जरिए प्रदेश के विकास कार्यों, शहरी यातायात व्यवस्था और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने की तैयारी की गई है।

मंत्रि-परिषद के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया गया कि राजधानी भोपाल के यातायात नेटवर्क को विस्तार देने के लिए भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के बजट को संशोधित किया गया है। अब मूल लागत और अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं को मिलाकर कुल 13,565.84 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित राशि मंजूर की गई है। इसके तहत मूल लागत 6,941.40 करोड़ रुपये में 3,092.22 करोड़ रुपये जोड़े गए हैं, जिससे नई संशोधित लागत 10,033.62 करोड़ रुपये हो गई है। इसके साथ ही उद्योग मानकों के अनुसार 3,532 करोड़ 22 लाख रुपये के अतिरिक्त वित्त पोषण को भी मंजूरी दी गई है। इस अतिरिक्त फंड में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से 995 करोड़ 9 लाख रुपये की इक्विटी, केंद्रीय करों के लिए 84 करोड़ 54 लाख रुपये का अधीनस्थ ऋण और बैंकों से 1,620 करोड़ 64 लाख रुपये का आंतरिक ऋण शामिल है। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण, राज्य करों और ब्याज (IDC) के लिए भी विशेष बजटीय प्रावधान किए गए हैं।

प्रशासनिक दक्षता और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने आगामी पांच वर्षों (2026-2031) के लिए आई.टी. संवर्ग परामर्श सेवाओं और कार्य योजना के मद में 235 करोड़ 63 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी है। इसमें से 180 करोड़ 20 लाख रुपये राज्य स्तरीय आई.टी. संवर्ग के गठन और परामर्श सेवाओं पर खर्च होंगे, जो विभिन्न विभागों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बिग डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे आधुनिक क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग देंगे। वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी कार्य योजना के लिए 55 करोड़ 43 लाख रुपये सुरक्षित किए गए हैं, जिसके माध्यम से VBTC केंद्र में सरकारी कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा और नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘ई-गवर्नेस उत्कृष्टता पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा।

कृषि और व्यापार जगत को राहत देते हुए राज्य सरकार ने कपास पर लगने वाली मंडी फीस को 1% से घटाकर 0.5% करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रदेश की लगभग 158 कपास जिनिंग मिलों की आर्थिक स्थिति सुधारने और व्यापार को पड़ोसी राज्यों में जाने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे इनपुट लागत कम होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके विपरीत, किसान हित के कार्यों को गति देने के लिए सामान्य मंडी शुल्क को 1 रुपये से बढ़ाकर 1.50 रुपये किया गया है। इससे होने वाली 500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वार्षिक आय का उपयोग जिलों में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक सुविधाओं के विकास के साथ-साथ किसान सड़क निधि तथा कृषि अनुसंधान में किया जाएगा।

किसानों से फसलों की सुचारू खरीद सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। आगामी रबी विपणन वर्ष 2026 में गेहूं की खरीद और खरीफ विपणन सत्र 2026-27 में धान व मोटे अनाजों के उपार्जन के लिए MPSCSC और मार्कफेड को बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेने के लिए 8,600 करोड़ रुपये की निःशुल्क शासकीय गारंटी (प्रत्याभूति) दी गई है। इसके अतिरिक्त, नागरिक आपूर्ति निगम (MPSCSC) को एक वर्ष के लिए 29,500 करोड़ रुपये की अलग से निःशुल्क सरकारी गारंटी उपलब्ध कराई गई है, जिससे खाद्यान्न साख सीमा के सुचारू प्रबंधन और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन में कोई बाधा न आए।

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