सीधी जिले का जल संरक्षण मॉडल बना मिसाल: ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने की सराहना, आजीविका और सिंचाई क्षमता में हुआ बड़ा इजाफा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में मध्यप्रदेश के सीधी जिले में जल संरक्षण और जनभागीदारी से हुए उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की है। यह उपलब्धि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के निरंतर प्रयासों, जिला प्रशासन की सक्रियता और स्थानीय नागरिकों के सहयोग का परिणाम है। सर्वोच्च नेतृत्व द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रयास को पहचान मिलने से सीधी जिले के साथ-साथ संपूर्ण राज्य में उत्साह का माहौल है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा-निर्देशों में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत जिले में जल संरक्षण को सीधे विकास और रोजगार से जोड़ा गया है। इस योजना के अंतर्गत सीधी में 1,489 खेत तालाबों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इन संरचनाओं ने बारिश के पानी के संचयन, भू-जल स्तर में सुधार और सिंचाई के साधनों को मजबूती प्रदान की है, जिससे किसानों को खेती के लिए नियमित रूप से पानी मिलना संभव हुआ है।
जिले भर में अब तक जल संरक्षण से जुड़े कुल 12,983 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इन व्यापक प्रयासों के फलस्वरूप सीधी की जल भंडारण क्षमता में 44,82,612 घनमीटर का अतिरिक्त इजाफा हुआ है। इसके बाद कुल जल संचयन क्षमता 1,35,73,874 घनमीटर से बढ़कर 1,80,56,486 घनमीटर तक पहुंच गई है। इस नई क्षमता से लगभग 896 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की सिंचाई संभव हो सकेगी और करीब एक लाख लोगों की रोजाना की पानी की जरूरतें पूरी की जा सकेंगी।
जल स्रोतों को दीर्घकालिक रूप से सहेजने के लिए जिले की पांचों जनपद पंचायतों में नदी पुनर्जीवन अभियान चलाया गया। इसके तहत हर जनपद में एक-एक नदी को चुनकर चेकडैम, स्टॉपडैम, बोल्डर चेकडैम और गैबियन जैसी विभिन्न संरचनाएं तैयार की गईं। इसका प्रत्यक्ष परिणाम यह रहा कि भीषण गर्मी के दिनों में भी नदियों में जल प्रवाह बना रहा। इसके साथ ही सिहावल विकासखंड के व्यवहार खांड, कुंनझुनकला, बहरी, अमराही और पोड़ी में लिफ्ट सिंचाई प्रणालियां स्थापित की गईं, जिनसे ऊंचाई पर बसे आदिवासी किसानों तक नदी का पानी पहुंचाया गया। इससे किसान अब खरीफ के अलावा रबी फसलों और सब्जियों की खेती करने लगे हैं, जिससे उनकी सालाना आय में 40 से 50 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।
सीधी जिले ने जल संचयन को आजीविका बढ़ाने का एक सशक्त जरिया बनाया है। वर्तमान में 211 तालाबों का उपयोग मत्स्य पालन और 178 तालाबों का उपयोग सिंघाड़ा उत्पादन के लिए किया जा रहा है। इन गतिविधियों से मछुआ समूहों, स्वयं सहायता समूहों और व्यक्तिगत मत्स्य पालकों को लगभग 80 लाख रुपये का सीधा आर्थिक फायदा हुआ है। इसके अलावा 18,600 फलदार पौधों पर आधारित हरित आजीविका मॉडल तैयार किया गया है, जिससे आने वाले समय में 3.59 करोड़ रुपये की वार्षिक आय की उम्मीद है। वहीं बेलहा डैम के पुनर्जीवन की परियोजना से कृषि आय में प्रतिवर्ष करीब 4.75 करोड़ रुपये की वृद्धि का अनुमान है।
सीधी जिले की यह सफलता साबित करती है कि जब सरकारी नीतियों को जनभागीदारी, वैज्ञानिक योजना और प्रशासनिक निष्ठा का सहयोग मिलता है, तो जल संरक्षण सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों को बचाने तक सीमित नहीं रहता। यह किसानों की आर्थिक समृद्धि, महिलाओं के रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सतत विकास का मजबूत आधार बनता है। ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री द्वारा किया गया उल्लेख इस मॉडल की राष्ट्रीय स्वीकार्यता को दर्शाता है, जिसने जिले के किसानों, आम नागरिकों और स्वयं सहायता समूहों का मनोबल बढ़ाया है।



