लोकसभा में भी वंदे मातरम विधेयक पारित, विपक्षी हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित

राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद गुरुवार को लोकसभा ने भी ‘वंदे मातरम विधेयक’ को पास कर दिया। विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के बीच इस विधेयक को पारित किया गया, जिसके तुरंत बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। अब लोकसभा की बैठक 31 जुलाई को सुबह 11 बजे पुनः शुरू होगी। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान ही कानूनी संरक्षण प्रदान करना है। नए प्रावधानों के तहत यदि कोई व्यक्ति ‘वंदे मातरम’ का अनादर करता है, तो उसे अधिकतम तीन वर्ष की कैद, जुर्माना अथवा दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।

सदन में विधेयक पास होने के पश्चात समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान ने सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश की एक बड़ी मुस्लिम आबादी की भावनाओं और चिंताओं को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए सरकार दोनों समुदायों के बीच दूरी बढ़ाना चाहती है। सपा सांसद ने सवाल उठाया कि इस विधेयक से युवाओं को रोजगार, महंगाई से राहत या भ्रष्टाचार और नीट जैसी समस्याओं का समाधान नहीं मिलेगा, बल्कि यह केवल देश के मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास है।

राष्ट्रगीत पर अपनी बात रखते हुए सपा सांसद ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय राष्ट्रगान का पूरी तरह सम्मान करता है और उसे गाता है। हालांकि, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के कुछ शब्द उनके धार्मिक विश्वासों से मेल नहीं खाते, जिसके कारण वे इसे गाने में असमर्थ हैं और इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस असहमति का कोई अन्य कारण नहीं है।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद विनोद तावड़े ने इस विधेयक का स्वागत किया। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने लिखा कि वंदे मातरम का सम्मान देश के स्वाभिमान से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जिस जयघोष ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को ऊर्जा, प्रेरणा और त्याग का मार्ग दिखाया, उस राष्ट्रीय गीत का स्मरण करना देशवासियों के लिए गर्व का विषय है।

इस बीच, संसद में एंटी-पेपर लीक मामले को लेकर भी विपक्ष ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग की। राज्यसभा में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जो कदम सरकार दो साल बाद उठा रही है, उसे 2024 में ही उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए तब जल्दबाजी में कानून लाया गया था। खड़गे ने कहा कि हालांकि वे इस नए संशोधन का स्वागत करते हैं, लेकिन यह अभी भी अधूरा है क्योंकि इसमें पेपर लीक के बाद की कार्रवाई पर तो जोर है, पर लीक रोकने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।

इसी मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद सागरिका घोष ने भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आकर जवाब देने की मांग की। उन्होंने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

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