पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की वार्ता में व्यापार वृद्धि पर जोर; रणनीतिक सहयोग के लिए भारत-फ्रांस ‘इनोवेशन रोडमैप 2030’ लागू

नीस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को नीस में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देने का संकल्प लिया। दोनों नेताओं ने आगामी पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार के परिमाण को दोगुना करने के उद्देश्य से एक विशेष संस्थागत ढांचा तैयार करने की घोषणा की। इस शिखर वार्ता का मुख्य फोकस आर्थिक प्रगति, उन्नत तकनीक और दोनों देशों के बीच पेशेवरों की गतिशीलता को बढ़ावा देकर आपसी साझेदारी को विविधता प्रदान करना था।

सफल वार्ता के बाद जारी संयुक्त घोषणापत्र के मुताबिक, दोनों राजनेताओं ने भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की वकालत की। नेताओं का मत था कि यह समझौता आपसी व्यापारिक निवेश को गति देने में मील का पत्थर साबित होगा। बैठक में छोटे व मझोले उद्योगों, रेलवे तथा विमानन क्षेत्रों में रणनीतिक तालमेल बढ़ाने के विकल्पों पर विस्तार से बात की गई। इसी कड़ी में कानपुर में एयरोनॉटिक्स क्षेत्र के कौशल विकास के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने से जुड़े द्विपक्षीय समझौते की सराहना की गई। आर्थिक सुरक्षा को लेकर शुरू हुए संवाद की सराहना करते हुए दोनों पक्ष आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने, विशेषकर आवश्यक खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सहमत हुए।

आधिकारिक बयान के अनुसार, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा देने के उपायों पर भी दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने चर्चा की। वार्ता के दौरान इस बात का विशेष जिक्र किया गया कि भारत का ‘शांति एक्ट’ दोनों देशों के लिए स्मॉल और एडवांस्ड मॉड्यूलर रिएक्टरों सहित ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग की रूपरेखा तय करते हुए दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक ‘इनोवेशन रोडमैप 2030’ को अपनी मंजूरी दी। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में सहकार्य बढ़ाने हेतु एक संयुक्त एआई वर्किंग ग्रुप बनाने का फैसला लिया गया।

इस यात्रा के दौरान नीस में ‘भारत इनोवेट्स’ का संयुक्त उद्घाटन किया गया। साथ ही पेरिस के आगामी ‘विवाटेक’ मंच पर प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी से दोनों देशों के बीच डीप-टेक, सेमीकंडक्टर, एग्री-टेक, चिकित्सा उपकरण (मेड-टेक), सौर व पवन ऊर्जा, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हो रहे कार्यों को नया बल मिलेगा। डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में फ्रांस के भीतर यूपीआई सेवाओं के निरंतर विस्तार और दोनों देशों के शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों के बीच हुए 19 महत्वपूर्ण समझौतों को दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस संबंधों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया।

दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संपर्क और समझ बढ़ाने को लेकर भी इस बैठक में सकारात्मक बातचीत हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांसीसी विमानपत्तनों पर भारतीय प्रवासियों के लिए वीजा-मुक्त ट्रांजिट व्यवस्था की त्वरित शुरुआत के लिए राष्ट्रपति मैक्रों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। वार्ता में दोनों देशों के बीच योग्य युवाओं, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के आवागमन को सरल बनाने तथा दोनों देशों की डिग्रियों व शैक्षणिक योग्यताओं को आपसी मान्यता देने की दिशा में प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया।

इस संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत फ्रांसीसी उच्च शिक्षण संस्थानों को देश में अपने विदेशी कैंपस खोलने के लिए आमंत्रित किया। साझा बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत के लोथल में आकार ले रहे राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के विकास सहित दोनों देशों के प्रमुख संग्रहालयों और सांस्कृतिक प्रतिष्ठानों के बीच संस्थागत सहयोग को निरंतर मजबूत किया जाएगा।

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