मध्य प्रदेश: देवास पुलिस और इटारसी GRP की बड़ी कार्रवाई, अंतर्राज्यीय चेन स्नैचिंग गिरोह सहित शातिर चोर गिरफ्तार; 58 लाख से अधिक का माल बरामद

मध्य प्रदेश पुलिस ने राज्यव्यापी अभियान के तहत संपत्ति संबंधी अपराधों पर लगाम कसते हुए दो अलग-अलग मामलों में बड़ी सफलता हासिल की है। देवास पुलिस और जीआरपी (GRP) इटारसी ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए एक अंतर्राज्यीय चेन स्नैचिंग गिरोह का भंडाफोड़ किया है और ट्रेनों में चोरी करने वाले एक शातिर अपराधी को दबोचा है। इन कार्रवाइयों के दौरान पुलिस ने कुल मिलाकर करीब 58 लाख 52 हजार रुपये मूल्य का मसरूका बरामद करने में कामयाबी हासिल की है।
इस मुहिम के तहत देवास पुलिस ने ‘ऑपरेशन त्रिनेत्रम’ चलाकर देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय एक संगठित अंतर्राज्यीय चेन चोर गिरोह के 7 सदस्यों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपियों में 4 महिला चोर और 3 पुरुष शामिल हैं। इस शातिर गिरोह ने पिछले दो हफ्तों के भीतर आगरा, ग्वालियर, शिवपुरी, जबलपुर के भेड़ाघाट और देवास जैसे शहरों में चेन स्नेचिंग की कुल 9 वारदातों को अंजाम दिया था।
देवास शहर में बीते 10 जून को हुई चोरी की एक घटना के बाद पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। पुलिस ने महज तीन दिनों के भीतर मुस्तैदी दिखाते हुए गिरोह के सभी सातों सदस्यों को धर दबोचा। पुलिस ने इनके पास से चोरी की गई सभी 9 सोने की चेनें (कुल वजन तकरीबन 156 ग्राम), वारदातों में इस्तेमाल की जाने वाली एक टाटा हेक्सा कार, 6 कीमती मोबाइल फोन और नकद राशि जब्त की है। बरामद की गई इस पूरी संपत्ति की कुल कीमत लगभग 50 लाख रुपये आंकी गई है। वहीं दूसरी तरफ, जीआरपी इटारसी ने ट्रेनों में चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से 8 लाख 52 हजार रुपये का माल बरामद किया है।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब देवास की रहने वाली 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला श्रीमती सरोज अग्रवाल ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि ए.बी. रोड स्थित मंडी व्यापारी एसोसिएशन धर्मशाला में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन चल रहा था। इसी दौरान भारी भीड़ का लाभ उठाकर किसी अज्ञात महिला ने उनके गले से सोने की चेन और पेंडल पार कर दिया, जिसकी कीमत लगभग 3 लाख 50 हजार रुपये थी। पीड़िता की रिपोर्ट पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और देवास पुलिस अधीक्षक (SP) श्री पुनीत गेहलोद के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम का गठन किया गया।
गिरोह को पकड़ने के लिए पुलिस ने ‘ऑपरेशन त्रिनेत्रम’ के तहत शहर में लगे सैकड़ों सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगाले। तकनीकी इनपुट और सक्रिय मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस टीम आरोपियों की सही लोकेशन का पता लगाने में कामयाब रही। इसके बाद पुलिस ने संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर सभी सात आरोपियों को दबोच लिया। पूछताछ में सामने आया कि ये सभी आरोपी मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले हैं, जो काफी समय से साउथ दिल्ली (दक्षिण दिल्ली) में डेरा डाले हुए थे। ये लोग देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाले बड़े धार्मिक कार्यक्रमों को चुनते थे और वहां आई महिला श्रद्धालुओं को अपना शिकार बनाते थे।
इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिराना था। गिरोह की महिला सदस्य भागवत कथा, प्रवचन, धार्मिक मेलों और शोभायात्राओं में आम श्रद्धालुओं की तरह तैयार होकर शामिल हो जाती थीं। इसके बाद आरती, प्रसाद वितरण या अत्यधिक भीड़भाड़ का फायदा उठाकर वे बड़ी ही सफाई से महिलाओं के गले से सोने के जेवरात उड़ा लेती थीं। इस दौरान गिरोह के पुरुष सदस्य आसपास रहकर पूरी स्थिति की निगरानी करते थे, महिलाओं को लाने-ले जाने के लिए वाहनों का इंतजाम संभालते थे और चोरी किए गए आभूषणों को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी निभाते थे।



