भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए मार्च 2027 तक होगा प्रभावी, केंद्रीय मंत्री गोयल ने दी जानकारी

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को घोषणा की है कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर इस वर्ष दिसंबर के आखिर तक हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे। आर्थिक राजधानी में आयोजित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के एक सम्मेलन में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह समझौता फरवरी या मार्च 2027 तक पूरी तरह अमल में आ सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस नीतिगत कदम से विभिन्न वस्तुओं पर लगने वाले टैरिफ में भारी कटौती होगी, जिससे यूरोपीय देशों के बाजारों में भारतीय उत्पादों को बड़ा मंच मिलेगा।

व्यापारिक सुगमता का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में करीब-करीब शून्य ड्यूटी के साथ पूरा यूरोपीय बाजार भारतीय व्यापार के लिए उपलब्ध होगा। उन्होंने आगामी रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि दिसंबर तक इस समझौते पर दोनों पक्ष दस्तखत कर देंगे और फरवरी-मार्च तक यह पूरी तरह क्रियान्वित हो जाएगा। आपको बता दें कि 27 सदस्य देशों वाले यूरोपीय संघ और भारत ने बीते 27 जनवरी को अपनी इस लंबी व्यापारिक वार्ता के पूरा होने की आधिकारिक घोषणा की थी, जिसे पीयूष गोयल ने सभी समझौतों में सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सौदा बताया था।

इस रणनीतिक समझौते के क्रियान्वयन से भारतीय निर्यात की लगभग 93 प्रतिशत वस्तुओं को यूरोपीय बाजार में ड्यूटी-फ्री यानी बिना किसी शुल्क के एंट्री मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत के बढ़ते कद को रेखांकित करते हुए गोयल ने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर विभिन्न देश भारत के साथ अपनी आर्थिक भागीदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के बेहद उत्सुक दिखाई दे रहे हैं, और यही वजह है कि संपूर्ण विश्व आज भारत की प्रगति को देख रहा है।

इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने द्विपक्षीय मोर्चे पर चल रही एक और बड़ी हलचल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर इसी हफ्ते भारत के दौरे पर पहुंच रहे हैं, जहां वे दोनों देशों के मध्य प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए चर्चा करेंगे।

संबोधन के अंतिम सत्र में वाणिज्य मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आर्थिक उन्नति के साथ देश की सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखना कितना आवश्यक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रगति और परंपरा को एक साथ लेकर चलना होगा। केंद्रीय मंत्री ने पीएम मोदी के विचारों को साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि राष्ट्र को आधुनिक विकास के साथ-साथ अपनी प्राचीन विरासत की भी उतनी ही आवश्यकता है। उन्होंने अंत में कहा कि इतिहास गवाह है कि कोई भी देश अपनी मूल संस्कृति, अनमोल विरासत और जीवंत परंपराओं को भुलाकर विकसित राष्ट्र की श्रेणी में खड़ा नहीं हो सका है।

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