रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं राष्ट्रपति; बेटियों की सफलता को सराहा, भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रमों में जोड़ने पर दिया बल

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। अपने दीक्षांत भाषण में राष्ट्रपति ने बौद्धिक विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों का प्राथमिक उत्तरदायित्व युवा पीढ़ी में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और अनुसंधान की प्रवृत्ति को जाग्रत करना है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए और पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा तथा स्थानीय भाषाओं को स्थान मिलना चाहिए, क्योंकि वास्तविक प्रगति आधुनिक ज्ञान और पारंपरिक जीवन मूल्यों के समन्वय से ही सुनिश्चित होती है।
समारोह के दौरान शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने विविध विषयों में सर्वोच्च अंक लाने वाले 20 प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को स्वयं स्वर्ण पदक सौंपे, जिन्होंने एक से अधिक क्षेत्रों में शीर्ष स्थान पाया था। समारोह में कुल 141 मेधावी छात्र-छात्राओं को 240 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जबकि 182 शोधार्थियों को उनकी पीएचडी और अन्य डिग्रियां सौंपी गईं। इससे पहले राष्ट्रपति ने परिसर में स्थापित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया।
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि स्वर्ण पदक विजेताओं में बेटियों की अधिक संख्या देश में महिला सशक्तिकरण और बदलते भारत की एक सुखद एवं सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा डिजाइन इनोवेशन सेंटर के माध्यम से पेटेंट हासिल करने के प्रयासों की भी सराहना की। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि देश को अपने युवाओं से बहुत उम्मीदें हैं। सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा जैसे शाश्वत मूल्यों को जीवन का आधार बनाकर ही युवा एक आदर्श नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे व्यक्तिगत सफलता से आगे बढ़कर ग्रामीण और जनजातीय समुदायों की समस्याओं को समझें और तकनीकी व व्यावहारिक नवाचारों के जरिए उनके समाधान खोजें।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ये डिग्रियां केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को आकार देने का एक सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने रानी दुर्गावती के नेतृत्व कौशल और आत्मगौरव को अनुकरणीय बताते हुए अकादमिक जगत से आह्वान किया कि देश के प्रत्येक विश्वविद्यालय को कम से कम पांच पिछड़े गांवों को गोद लेना चाहिए। इससे विद्यार्थियों में सामाजिक सेवा की भावना पैदा होगी। राज्यपाल ने मध्य प्रदेश में निवासरत बैगा, भारिया और सहरिया जैसे विशेष रूप से पिछड़े जनजातीय समूहों के कल्याण के लिए चलाई जा रही पीएम जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना का उल्लेख करते हुए युवाओं से विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग देने की अपील की।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के शैक्षणिक परिदृश्य को सामने रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान बना रहा है। राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सकल नामांकन दर (जीईआर) बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई है, जो देश के औसत से बेहतर है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को तकनीकी और रोजगार से जुड़ी शिक्षा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिसके तहत तीन नए शासकीय विश्वविद्यालयों की स्थापना की जा रही है। किसान कल्याण वर्ष का संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश में कृषि शिक्षा और तकनीकी आधारित आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने वीरांगना रानी दुर्गावती के ऐतिहासिक महत्व को याद करते हुए मेधावी बेटियों की सफलता पर गहरा गर्व व्यक्त किया।
इस महत्वपूर्ण आयोजन की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान की धुनों के बीच दीप प्रज्ज्वलन से हुई। इसके उपरांत कुलगुरु प्रो. डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री का स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए। कुलगुरु ने अपनी रिपोर्ट में गौरव के साथ बताया कि विश्वविद्यालय ने पहली बार एनएएसी (NAAC) द्वारा ‘A+’ ग्रेड प्राप्त किया है। इस समारोह का एक मुख्य आकर्षण पदक विजेता विद्यार्थियों का शीर्ष नेतृत्व के साथ संयुक्त छायाचित्र रहा। कार्यक्रम में प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार, सांसद श्रीमती सुमित्रा वाल्मीक, सांसद श्री आशीष दुबे, जबलपुर के महापौर श्री जगत बहादुर सिंह, विभिन्न क्षेत्रों के विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक व शिक्षार्थी मौजूद रहे।



