इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग: जेवर में ₹6,750 करोड़ के निवेश से लगेंगे दो नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट

उत्तर प्रदेश के जेवर (यमुना सिटी) में 27 जून को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एम्बर एवं एसेंट कंपनियों के नए इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स का शिलान्यास किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में ही एडवांस्ड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) का निर्माण शुरू होने से देश के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी। यह कदम भारत की वैश्विक साख को बढ़ाने और घरेलू स्तर पर आत्मनिर्भरता हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगा।
सोशल मीडिया के जरिए इस विकास कार्य की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन संयंत्रों में उत्पादित होने वाला प्रत्येक पीसीबी देश के आर्थिक हितों की रक्षा करेगा। इससे विदेशी मुद्रा की बर्बादी रुकेगी, रुपये की स्थिति सुदृढ़ होगी और हमारे व्यापारिक भुगतान संतुलन में सकारात्मक बदलाव आएगा। यह परियोजना भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है।
औद्योगिक निवेश के विवरण के अनुसार, दक्षिण कोरियाई कंपनी ‘केसीसी’ के साथ मिलकर ‘एसेंट-के सर्किट’ यहां 3,250 करोड़ रुपये की लागत से एक उन्नत पीसीबी निर्माण इकाई लगा रही है। यह इकाई इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए उच्च घनत्व (हाई-डेंसिटी) और बहु-परतीय (मल्टी-लेयर) पीसीबी तैयार करेगी। इसके अलावा, एम्बर एंटरप्राइजेज द्वारा 3,500 करोड़ रुपये के निवेश से एक अन्य इकाई स्थापित की जा रही है, जो विशेष रूप से एचवीएसी उपकरणों और पीसीबी असेंबली का उत्पादन करेगी।
आयात पर निर्भरता के संबंध में पुराने संदर्भों को साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत सालाना तकरीबन 40,000 करोड़ रुपये के पीसीबी का आयात अन्य देशों से करता है। स्थानीय स्तर पर इन फैक्ट्रियों के शुरू होने से न केवल आयात बिल में कटौती होगी, बल्कि घरेलू विनिर्माण क्षमता भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगी।
जेवर क्षेत्र के रणनीतिक महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि यहां का आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर निवेशकों को तेजी से आकर्षित कर रहा है। परिचालन में आ रहे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और प्रस्तावित दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना के कारण यह पूरा इलाका दुनिया के बड़े औद्योगिक घरानों की पहली पसंद बनता जा रहा है। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि उन्नत अवसंरचना और औद्योगिक निवेश के समन्वय से देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने, स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने में मदद मिलेगी।



