सेशेल्स की संसद को संबोधित कर पीएम मोदी ने रचा इतिहास, मिला देश का सर्वोच्च सम्मान

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को द्वीपीय राष्ट्र सेशेल्स की नेशनल असेंबली में अपना विशेष संबोधन दिया। वैश्विक स्तर पर किसी विदेशी संसद में प्रधानमंत्री का यह 20वां भाषण था, जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है। इस ऐतिहासिक अवसर पर सेशेल्स की संसद को धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और सेशेल्स के बीच 50 वर्षों का एक पुराना और अटूट नाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सेशेल्स की जनता के मन में भारतीयों के प्रति गहरा आदर है और दोनों राष्ट्र आपसी सहभागिता तथा स्नेह के बल पर आगे बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेशी सरजमीं पर संसदीय संबोधनों की शुरुआत साल 2014 में ही हो गई थी, जब उन्होंने देश की कमान संभाली थी। अपने शुरुआती दौर में उन्होंने भूटान, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया और फिजी के लोकतंत्र के मंदिरों में अपनी बात रखी। यह क्रम साल 2015 में भी तेजी से आगे बढ़ा, जब प्रधानमंत्री ने मॉरीशस की नेशनल असेंबली सहित श्रीलंका, मंगोलिया, ब्रिटेन और अफगानिस्तान की संसदों में भारत का दृष्टिकोण साझा किया।

इस कूटनीतिक यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर तब स्थापित हुआ जब प्रधानमंत्री ने साल 2016 और फिर साल 2023 में अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। अमेरिका के संसदीय इतिहास में दो बार संयुक्त सत्र को संबोधित करने वाले वे एकमात्र भारतीय प्रधानमंत्री हैं। इसके अलावा, उन्होंने साल 2018 में युगांडा, 2019 में मालदीव और साल 2024 में गुयाना की राष्ट्रीय संसदों को भी अपनी यात्राओं के दौरान संबोधित किया।

अफ्रीका महाद्वीप और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने की नीति के तहत साल 2025 में भी यह यात्रा चलती रही। पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री ने घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा नामीबिया की संसदों को अपनी आवाज दी। वहीं दिसंबर 2025 में उन्होंने इथियोपिया की संसद के संयुक्त सत्र के सामने अपना वक्तव्य रखा। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए इसी साल 25 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री ने अपनी आधिकारिक यरुशलम यात्रा के दौरान इजरायल की संसद ‘नेसेट’ में भाषण दिया और ऐसा करने वाले पहले भारतीय शासनाध्यक्ष बने।

इस बार सेशेल्स की संसद में भी यह कीर्तिमान दोहराया गया है, जहाँ वे संबोधन देने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने हैं। प्रस्थान करने से पहले डिजिटल माध्यम ‘एक्स’ पर अपनी भावनाओं को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि सेशेल्स की नेशनल असेंबली का यह निमंत्रण दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक ढांचे और संसदीय गौरव को दर्शाता है। उन्होंने इस अवसर पर सेशेल्स में रह रहे भारतीय समुदाय की भूमिका को भी सराहा, जो लंबे समय से दोनों देशों की दोस्ती की मजबूत कड़ी बने हुए हैं।

इस द्विपक्षीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘गार्डियन ऑफ द糊 ब्लू होराइजन’ से नवाज कर एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ा गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों और सतत विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए दिया गया है। सम्मान ग्रहण करने के बाद रविवार को प्रधानमंत्री ने सेशेल्स प्रशासन का आभार जताया और इस सम्मान को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना कर रहे सभी राष्ट्रों तथा भावी पीढ़ी के पर्यावरण रक्षकों को समर्पित किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

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