सेशेल्स यात्रा पर गए पीएम मोदी को मिला वहां का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, नेशनल असेंबली को संबोधित कर रचेंगे इतिहास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय वैश्विक योगदान के लिए सेशेल्स के सर्वोच्च सम्मान ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया है। रविवार को सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने प्रधानमंत्री मोदी को इस विशेष उपाधि से अलंकृत किया। शनिवार से शुरू हुए अपने तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी ने स्टेट हाउस में ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ का निरीक्षण किया और राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता में हिस्सा लिया।
सेशेल्स द्वारा दिया गया यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी के उस ‘ग्रीन विज़न’ को वैश्विक मान्यता देता है जो पर्यावरण अनुकूल नीतियों और सतत आर्थिक उन्नति पर केंद्रित है। पीएम मोदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले सम्मानों की सूची में यह नवीनतम जुड़ाव है। इससे पहले, इसी वर्ष मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने कृषि विकास और खाद्य सुरक्षा के प्रयासों के लिए उन्हें ‘एग्रीकोला मेडल’ से सम्मानित किया था। वहीं, वैश्विक सहयोग के लिए वर्ष 2018 में उन्हें ‘सोल पीस प्राइज’ और पर्यावरण क्षेत्र के सर्वोच्च सम्मान ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड’ से भी नवाजा जा चुका है।
अपनी इस राजनयिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने जा रहे हैं। इसके साथ ही, वह सेशेल्स की नेशनल असेंबली को भी संबोधित करेंगे। इस संबोधन के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी के नाम एक नया वैश्विक रिकॉर्ड दर्ज होगा, क्योंकि वह 20 अलग-अलग देशों की संसदों को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन जाएंगे। वह वहां रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे।
सेशेल्स के लिए प्रस्थान करने से पूर्व प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में दोनों देशों के गहरे ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला था। उन्होंने कहा था कि भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों की स्थापना को इस वर्ष 50 साल पूरे हो रहे हैं। यह साझेदारी साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी भरोसे और दोनों देशों के नागरिकों के बीच गहरे आत्मीय जुड़ाव पर आधारित है। उन्होंने सेशेल्स को भारत का एक प्रमुख समुद्री पड़ोसी और वैश्विक दक्षिण के विजन में एक महत्वपूर्ण भागीदार बताया।
प्रधानमंत्री ने नेशनल असेंबली को संबोधित करने के अवसर को एक गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों की मजबूत संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने भारतीय समुदाय की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीयों ने पीढ़ियों से इस विशेष मित्रता को मजबूत करने में एक जीवंत सेतु की भूमिका निभाई है।
अपने वक्तव्य के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया था कि इस यात्रा से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सहयोग का दायरा और अधिक व्यापक होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के इस संयुक्त प्रयास से हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के साझा दृष्टिकोण को और गति मिलेगी।



